JPSC मेधा घोटाले में बड़ा खुलासा, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 12 पर चार्जशीट, 82 जब्तियों का ब्योरा अदालत में पेश
97 पन्नों के आरोपपत्र में डिजिटल साक्ष्य, CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड शामिल, 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे से पहले 267 अभ्यर्थियों का डेटा लीक होने का आरोप, अब अदालत में आगे बढ़ेगी सुनवाई

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर जांच तेज हो गई है। अपराध अनुसंधान विभाग यानी CID ने आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत 12 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में 97 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी ने इसमें इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्य, आरोपियों के बयान और जब्त वस्तुओं का विवरण शामिल किया है। आरोपपत्र के 14 पन्नों में 82 जब्तियों की सूची दी गई है।
यह मामला परीक्षा संचालन, गोपनीय जानकारी के कथित लीक, ओएमआर शीट में संभावित हेरफेर और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है। CID का दावा है कि जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका सामने आई है। हालांकि, आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
82 जब्तियों की सूची, डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य भी शामिल
CID की ओर से दाखिल आरोपपत्र में जब्त की गई वस्तुओं का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। इस सूची में कुल 82 जब्तियों का उल्लेख है। जांच एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ आरोपियों के बयान भी अदालत में प्रस्तुत किए हैं। इन साक्ष्यों के जरिए परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड, संबंधित लोगों के संपर्क और कथित अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया है।
जांच में परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज और परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों तथा सफल अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण भी किया गया। एजेंसी का कहना है कि इन रिकॉर्ड की जांच से परीक्षा प्रक्रिया और संबंधित लोगों के बीच संपर्क को समझने में मदद मिली।
नतीजे से पहले 267 अभ्यर्थियों का डेटा साझा करने का आरोप
इस मामले में सबसे अहम आरोप 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से पहले चयनित अभ्यर्थियों की गोपनीय जानकारी साझा किए जाने का है। CID के अनुसार, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारी मोहम्मद उस्मान के बीच हुई WhatsApp बातचीत में चयनित अभ्यर्थियों का डेटा साझा किए जाने के संकेत मिले।
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित तौर पर कुल 267 अभ्यर्थियों का विवरण परिणाम जारी होने से पहले साझा किया गया था। इनमें बिहार के 146, उत्तर प्रदेश के 82 और हरियाणा के 14 अभ्यर्थियों का नाम शामिल बताया गया है। आरोपपत्र में परीक्षा से जुड़े प्रश्नों, उत्तरों, ओएमआर शीट के पुनर्मूल्यांकन और श्रेणीवार आंकड़ों के आदान-प्रदान का भी उल्लेख है। ये सभी जांच एजेंसी के आरोप हैं, जिनकी न्यायिक प्रक्रिया में जांच होनी है।
CCTV और कॉल डिटेल से जांच को मिली दिशा
CID ने अदालत में पेश किए गए विवरण में परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR के विश्लेषण का उल्लेख किया है। जांच एजेंसी ने परीक्षा से जुड़े अधिकारियों, आयोग के कर्मचारियों और निजी परीक्षा एजेंसी के कर्मचारियों के बीच संपर्कों की पड़ताल की। इन रिकॉर्ड के आधार पर कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि परीक्षा की गोपनीय जानकारी किन लोगों तक पहुंची और संबंधित व्यक्तियों के बीच किस तरह संपर्क बना हुआ था।
जांच के दायरे में सफल अभ्यर्थियों रवि कुमार, सेजल सेहरावत, विवेक कुमार और शालिनी राठी के परीक्षा केंद्र भी शामिल रहे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत भूमिका के बारे में विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आया है। केवल जांच के दायरे में नाम या परीक्षा केंद्र आने से किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता साबित नहीं होती।
परीक्षा एजेंसी और ओएमआर शीट में हेरफेर की भी जांच
इस मामले में निजी परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी TDPL की भूमिका भी जांच के दायरे में है। CID ने परीक्षा संचालन से लेकर परिणाम जारी होने तक कथित अनियमितताओं की जांच की है। आरोपपत्र से जुड़े विवरण में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़, परीक्षा संबंधी गोपनीय रिकॉर्ड साझा करने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे आरोपों का उल्लेख है।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी समय से पहले साझा की गई। इन आरोपों की पुष्टि के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। अदालत में इन साक्ष्यों की जांच के बाद ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत 12 आरोपी
आरोपपत्र में तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते और तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के अलावा निजी परीक्षा एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह, एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर और कथित मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद एबाद, हेमंत कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, सुमन सौरभ और अरविंद कुमार के नाम शामिल बताए गए हैं।
CID ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया है। मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही के दौरान आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किया जाएगा। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम अधिकार न्यायालय के पास है।
अब अदालत की कार्यवाही पर टिकी निगाहें
JPSC मेधा घोटाला मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसी की ओर से पेश किए गए 97 पन्नों के आरोपपत्र, 82 जब्तियों की सूची, डिजिटल साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड की अदालत में जांच होगी। इस मामले में अगली सुनवाई 10 नवंबर 2026 को निर्धारित किए जाने की खबर भी सामने आई है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भरोसे से जुड़े इस मामले में अब अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी के आरोपों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण होने के बाद ही यह तय होगा कि किन आरोपों को न्यायिक रूप से साबित किया जा सकता है।









