Shaurya Diwas 2026: राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के वीर जवानों को किया सलाम, बोले देश को इन्फैंट्री के साहस और बलिदान पर गर्व

27 अक्टूबर को मनाया जा रहा शौर्य दिवस और इन्फैंट्री दिवस, रक्षा मंत्री ने 1947 से लेकर आज तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पैदल सैनिकों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को किया याद

नई दिल्ली। शौर्य दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की इन्फैंट्री यानी पैदल सेना के जवानों के साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि 1947 के ऐतिहासिक युद्ध से लेकर आज की चुनौतीपूर्ण सीमाओं तक भारतीय इन्फैंट्री के जवानों ने हर मुश्किल परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए मोर्चा संभाला है। देश को अपने इन वीर सैनिकों की बहादुरी, समर्पण और बलिदान पर गर्व है।

रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जब भी देश को सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी, पैदल सेना के जवान कठिन परिस्थितियों के सामने मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए असाधारण साहस दिखाया और जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटे।

इन्फैंट्री के अदम्य साहस को किया याद

राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में भारतीय इन्फैंट्री के उन जवानों को याद किया, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि सैनिकों की कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा, वीरता और देश के लिए समर्पण भारतीय सशस्त्र बलों की गौरवशाली परंपराओं का हिस्सा है।

रक्षा मंत्री के मुताबिक, इन्फैंट्री के जवानों का साहस केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। दुर्गम इलाकों और चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर लगातार तैनात रहकर वे देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। उनका अनुशासन, कठिन परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान का जज्बा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

उन्होंने देश की ओर से सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय इन्फैंट्री की सेवा और बलिदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

27 अक्टूबर का दिन क्यों है खास

भारत में हर साल 27 अक्टूबर को इन्फैंट्री दिवस मनाया जाता है, जिसे शौर्य दिवस के रूप में भी याद किया जाता है। इस तारीख का संबंध वर्ष 1947 की उस ऐतिहासिक घटना से है, जब भारतीय सेना के जवान श्रीनगर पहुंचे थे और जम्मू-कश्मीर की रक्षा के लिए अभियान शुरू किया था।

26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अगले दिन, 27 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए सेना की पहली टुकड़ियों को श्रीनगर पहुंचाया गया। इस अभियान में सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उस समय जम्मू-कश्मीर पर कबायली हमलावरों के आक्रमण के बीच भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाला। इसी ऐतिहासिक सैन्य अभियान की याद में हर साल 27 अक्टूबर को इन्फैंट्री दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के जवानों की वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करने का अवसर है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी दिया जोर

शौर्य दिवस पर सैनिकों को नमन करने के साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नवाचार के महत्व पर भी जोर दिया। भारतीय नौसेना के वार्षिक सेमिनार स्वावलंबन 2026 के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के प्रयास अब अगले चरण में पहुंच रहे हैं और इसमें नवोन्मेषी लोगों की भूमिका अहम होगी।

उन्होंने सुझाव दिया कि उन क्षेत्रों की स्पष्ट सूची तैयार की जानी चाहिए, जिनमें भारत को आत्मनिर्भर बनना है। साथ ही यह भी तय होना चाहिए कि निर्धारित लक्ष्यों को किस समयसीमा के भीतर हासिल किया जाएगा। उनके अनुसार, स्पष्ट लक्ष्य और समयबद्ध योजना रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक तथा नवाचार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।

शौर्य दिवस का अवसर भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास को याद करने के साथ-साथ देश की सुरक्षा को मजबूत बनाने के संकल्प को दोहराने का भी अवसर है। इन्फैंट्री के जवानों का साहस, अनुशासन और बलिदान भारतीय सैन्य परंपरा की महत्वपूर्ण पहचान बना हुआ है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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