मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला ! अब शादी, तलाक, लिव-इन और संपत्ति पर सभी के लिए एक जैसे नियम
समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को हरी झंडी; महिलाओं के अधिकार, लिव-इन रजिस्ट्रेशन और उत्तराधिकार में बड़े बदलाव का प्रस्ताव

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) के प्रस्तावित मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना तथा महिलाओं को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद-44 में वर्णित समान नागरिक संहिता की भावना के अनुरूप है और समानता, न्याय, लैंगिक समानता तथा विधि के शासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
प्रस्तावित UCC की प्रमुख बातें
1. सभी के लिए एक समान विवाह और तलाक के नियम
- सभी समुदायों के लिए एक पत्नी/एक पति (Monogamy) का प्रावधान।
- तीन तलाक और मौखिक तलाक को मान्यता नहीं।
- विवाह की न्यूनतम आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष।
- शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
- निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को बढ़ावा देना या मजबूर करना दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव।
2. लिव-इन रिलेशनशिप पर नए नियम
- लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
- बिना रजिस्ट्रेशन लंबे समय तक साथ रहने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित।
- लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा और उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा।
- महिला पार्टनर को अलगाव की स्थिति में भरण-पोषण (मेंटेनेंस) मांगने का अधिकार होगा।
3. बेटा-बेटी को समान अधिकार
- संपत्ति में बेटों और बेटियों को बराबर अधिकार।
- विधवा और विधुर के अधिकार समान होंगे।
- माता और पिता दोनों को उत्तराधिकार में समान दर्जा देने का प्रस्ताव।
4. वसीयत की स्वतंत्रता
- स्वस्थ वयस्क अपनी पूरी संपत्ति वसीयत के माध्यम से किसी भी व्यक्ति के नाम कर सकेंगे।
- यह व्यवस्था भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत संचालित होगी।
5. बच्चों के अधिकार
- ‘अवैध संतान’ (Illegitimate) शब्द हटाने का प्रस्ताव।
- विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी या ART से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार।
6. अनुसूचित जनजातियों को छूट
- संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध अनुसूचित जनजातियां, जैसे भील, गोंड, बैगा, सहरिया, कोरकू और भारिया, इस प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रहेंगी।
अभी क्या स्थिति है?
कैबिनेट ने ‘मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026’ के प्रस्तावित मसौदे को मंजूरी दी है। इसके लागू होने से पहले विधेयक को निर्धारित विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। कानून प्रभावी होने के बाद ही इसके प्रावधान लागू होंगे।









