ब्रेकिंग- हेमंत सरकार को डबल झटका : JSSC CGL समेत CDPO और FSO नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब,
Breaking – Double blow for the Hemant government: High Court stays the decision to cancel appointments for JSSC CGL, CDPO, and FSO; seeks a response from the government.

रांची। झारखंड सरकार द्वारा JSSC CGL, CDPO, FRO और FSO समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को लेकर आज झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायाधीश दीपक रौशन की अदालत में हुई। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में भी सेम ऑर्डर फॉलो होगा। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद कई नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
सुनवाई के बाद अदालत ने स्टेट फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही कार्मिक विभाग के नोटिफिकेशन से प्रभावित अभ्यर्थियों और अधिकारियों को याचिका के अंतिम निपटारे तक काम करने की अनुमति देने का निर्देश दिया गया है।
यह आदेश कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग के ज्ञापांक-06/लो०से०आ०-01-07/2026, का-545, रांची, दिनांक 18 अगस्त 2026 से जुड़े मामले में आया है।
तीन नियुक्तियां हुई थीं रद्द
गौरतलब है कि कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा 18 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन के जरिए तीन नियुक्तियों को रद्द किया गया था। इनमें—
विज्ञापन संख्या 18/23 के तहत नियुक्त स्टेट फूड ऑफिसर
विज्ञापन संख्या 21/2024 से नियुक्त राज्य सेवा के अधिकारी
विज्ञापन संख्या 21/23 से नियुक्त CDPO शामिल हैं।
वहीं, सरकार की ओर से JSSC CGL, CDPO, FRO और FSO परीक्षा/नियुक्ति रद्द करने के फैसले को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। हाईकोर्ट के आज के आदेश के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
CID जांच की रिपोर्ट भी होगी अहम
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की CID जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी भी अगली सुनवाई में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान CID जांच में मिले तथ्यों को कोर्ट के समक्ष रखा जाए।
मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने पक्ष रखा। वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने दलीलें पेश कीं। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने पक्ष रखा, जबकि JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अदालत में पक्ष रखा।
15 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। उस दौरान राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा और CID जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी भी अदालत के सामने रखी जाएगी।
फिलहाल हाईकोर्ट की रोक के बाद रद्द की गई नियुक्तियों से प्रभावित अभ्यर्थियों और अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। अब सबकी नजरें 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।









