BREAKING: जंक फूड पर सरकार का बड़ा वार! सरकारी दफ्तरों में समोसा-चिप्स की जगह मिलेगा हेल्दी खाना, मेन्यू भी हुआ तय
फडणवीस सरकार का नया आदेश, मीटिंग, ट्रेनिंग, इवेंट और कैंटीन में पौष्टिक भोजन पर जोर; कम नमक, चीनी और तेल वाले खाद्य पदार्थों को मिलेगी प्राथमिकता

मुंबई। जंक फूड खाने की बढ़ती आदत और उससे जुड़ी स्वास्थ्य चिंताओं को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। फडणवीस सरकार ने सरकारी और सेमी-गवर्नमेंट दफ्तरों में अनहेल्दी जंक फूड की बिक्री और परोसने को सीमित करने का आदेश जारी किया है।
2 सितंबर को जारी सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक अब सरकारी कार्यालयों की कैंटीन, मीटिंग, इवेंट, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ्रेंस में पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दी जाएगी।
ICMR-NIN और FSSAI के दिशा-निर्देशों पर आधारित होगा मेन्यू
सरकार की ओर से तैयार किए जाने वाले हेल्दी मेन्यू में ICMR-NIN और FSSAI के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखा जाएगा।
खाने में नमक, चीनी और तेल की मात्रा कम रखने पर विशेष जोर होगा। सरकार का मानना है कि खराब खान-पान और लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए स्वस्थ भोजन को बढ़ावा देना जरूरी है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और हृदय संबंधी बीमारियों जैसी समस्याओं को देखते हुए सरकारी कार्यालयों में हेल्दी फूड विकल्प उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
सरकारी दफ्तरों की कैंटीन में क्या-क्या मिलेगा?
सरकार ने हेल्दी मेन्यू के तहत कई पारंपरिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने के विकल्प सुझाए हैं। इनमें—
- फल
- भुने या उबले चने
- कम नमक वाली मूंगफली
- अंकुरित अनाज का सलाद
- वेजिटेबल पोहा
- उपमा
- इडली-सांभर
- बाजरा खिचड़ी
- थालीपीठ
- उबले अंडे
- ड्राई फ्रूट्स
- सलाद
जैसे विकल्प शामिल हैं।
यानी सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को अब तले-भुने और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह अधिक पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
चाय-कॉफी की जगह मिलेंगे ये हेल्दी ड्रिंक्स
सरकार ने सिर्फ खाने में ही नहीं, बल्कि पेय पदार्थों में भी बदलाव के विकल्प सुझाए हैं।
कैंटीन और सरकारी कार्यक्रमों में नारियल पानी, छाछ, सोलकढ़ी, बिना चीनी वाला दूध, ग्रीन टी, हर्बल टी और कम चीनी या गुड़ से बना नींबू पानी जैसे विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
लंच और डिनर में भी बदलेगा मेन्यू
सरकारी दफ्तरों में लंच और डिनर के दौरान भी पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देने का निर्देश है।
मेन्यू में ज्वार, बाजरा और रागी की रोटियां, मल्टीग्रेन रोटियां, ब्राउन राइस, दाल, अंकुरित अनाज की डिश, हरी और मौसमी सब्जियां, दही, छाछ और सलाद जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करने का प्रावधान किया गया है।
इसका उद्देश्य कर्मचारियों को रोजमर्रा के भोजन में अधिक पौष्टिक और संतुलित विकल्प उपलब्ध कराना है।
आदेश का पालन कराने के लिए बनेगी कमेटी
सरकार ने यह भी तय किया है कि सिर्फ आदेश जारी करने के बजाय उसके पालन की निगरानी भी की जाएगी। इसके लिए मेन्यू निरीक्षण समिति गठित की जाएगी और एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
यह समिति यह देखेगी कि सरकारी कार्यालयों की कैंटीन और कार्यक्रमों में तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं।
FDA के साथ कैंटीन का होगा ऑडिट
कैंटीन की व्यवस्था की समय-समय पर जांच भी की जाएगी। इसके लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के सहयोग से कैंटीन का ऑडिट कराने की व्यवस्था की गई है।
सरकार ने ज्यादा नमक, चीनी और तेल वाले खाद्य पदार्थों के साथ-साथ अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैक्ड जंक फूड की बिक्री को धीरे-धीरे कम करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी दफ्तरों से शुरू होगी हेल्दी फूड की मुहिम
महाराष्ट्र सरकार की इस पहल का मकसद सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों और वहां आने वाले लोगों के लिए बेहतर भोजन विकल्प उपलब्ध कराना है।
अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो सरकारी दफ्तरों की कैंटीन में खान-पान का पूरा माहौल बदलता नजर आ सकता है—जहां जंक फूड की जगह मिलेट्स, फल, अंकुरित अनाज, सलाद और कम चीनी-नमक वाले विकल्प ज्यादा दिखाई देंगे।








