यूपी में चुनाव का काउंटडाउन शुरू? चुनाव आयोग के अचानक एक्शन से मची हलचल, 18 जिलों में बड़ी बैठक, अधिकारियों के ट्रांसफर से लेकर वोटर लिस्ट तक पर सख्ती

2027 में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले चुनाव आयोग ने यूपी के चार मंडलों के 18 जिलों में तैयारियों की समीक्षा की है। अधिकारियों को मतदाता सूची, EVM-VVPAT और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियों को लेकर जिस तरह सक्रियता बढ़ाई है, उससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आयोग ने यूपी के चार मंडलों के 18 जिलों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा की है। अधिकारियों को मतदाता सूची से लेकर मतदान केंद्रों की व्यवस्था और सुरक्षा तक हर मोर्चे पर तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, चुनावी कामकाज से जुड़े अधिकारियों के तबादलों को लेकर भी आयोग पहले ही सख्त निर्देश जारी कर चुका है।

दरअसल, साल 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन पांच राज्यों में चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। वहीं चुनाव आयोग भी निष्पक्ष और व्यवस्थित चुनाव कराने के लिए तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश पर आयोग का ध्यान है, क्योंकि यह पांचों राज्यों में सबसे बड़ा चुनावी राज्य है।

18 जिलों में चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, अधिकारियों को मिले सख्त निर्देश

2 नवंबर को चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के चार मंडलों के 18 जिलों में चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मतदाता सूचियों को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए। नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को सुधारने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

आयोग ने मतदान केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ EVM और VVPAT मशीनों के प्रबंधन को लेकर भी तैयारी तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादलों पर भी आयोग सख्त

चुनाव आयोग ने इससे पहले उत्तर प्रदेश में अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी अहम निर्देश जारी किए थे। आयोग ने कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल ऐसे अधिकारियों को उनके गृह जिलों से दूर तैनात किया जाए, जिनकी पोस्टिंग चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है।

इसके अलावा आयोग ने उन अधिकारियों को भी जिले से हटाने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने निर्धारित अवधि के दौरान एक ही जिले में तीन साल पूरे कर लिए हैं। यह नियम 31 मई 2027 तक की अवधि को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। आयोग की इस नीति के दायरे में चुनावी कामकाज से जुड़े कई पद शामिल हैं।

इनमें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), जॉइंट मजिस्ट्रेट और तहसीलदार जैसे अधिकारी शामिल हैं। इसका उद्देश्य चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था में निष्पक्षता बनाए रखना और किसी एक जिले में लंबे समय से तैनात अधिकारियों के प्रभाव को सीमित करना है।

30 नवंबर तक मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे 30 नवंबर तक संयुक्त रिपोर्ट सौंपें। इस रिपोर्ट में आयोग के निर्देशों के अनुसार अधिकारियों के तबादलों और अन्य जरूरी कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा।

इस तरह चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने, मतदान केंद्रों की सुविधाएं बढ़ाने, EVM-VVPAT के प्रबंधन, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

क्या जल्द हो सकता है चुनाव की तारीखों का ऐलान?

उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में समीक्षा बैठक और अधिकारियों के तबादलों को लेकर जारी निर्देशों के बाद चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी विधानसभा चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। ऐसे में केवल इन बैठकों के आधार पर चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिलहाल आयोग की सक्रियता से इतना साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं।

 

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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