बिहार में बड़ी वारदात की तैयारी? कार की सीट के नीचे छिपे मिले 19 हजार से ज्यादा कारतूस, यूपी से आ रही थी मौत की खेप, STF ने तीन तस्करों को दबोचा

भोजपुर में पटना STF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय कारतूस तस्करी गिरोह का खुलासा हुआ है। बदायूं से बिहार लाई जा रही करीब 19,200 कारतूसों की खेप बरामद की गई। पुलिस अब गिरोह के सरगना और खरीदारों की तलाश में जुटी है।

 

आरा। बिहार में अवैध हथियारों और कारतूसों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। भोजपुर जिले में पटना एसटीएफ और भोजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसे अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसकी खेप देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। तस्कर एक एसयूवी में सीट के नीचे छिपाकर 19 हजार से अधिक कारतूस बिहार ला रहे थे। पुलिस ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से एक मैगजीन और लोडेड पिस्टल भी बरामद हुई है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बरामद कारतूसों की संख्या करीब 19,200 बताई जा रही है। आरोपी उत्तर प्रदेश के बदायूं से कारतूसों की बड़ी खेप लेकर बिहार पहुंच रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन कारतूसों की सप्लाई मुजफ्फरपुर, सीवान, सुपौल और दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में की जानी थी। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी खेप किसके लिए मंगाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

कुल्हड़िया टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोकी संदिग्ध SUV

यह कार्रवाई सोमवार को आरा-पटना नेशनल हाईवे-922 पर कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास की गई। पुलिस को एक दिन पहले ही खुफिया सूचना मिल गई थी कि उत्तर प्रदेश से कारतूसों की बड़ी खेप लेकर एक वाहन बिहार में प्रवेश करने वाला है। इसके बाद एसटीएफ और भोजपुर पुलिस की टीम ने संदिग्ध वाहन पर नजर रखनी शुरू कर दी।

बताया गया कि आरोपी रविवार रात वाराणसी में रुके थे। सोमवार सुबह उनके बिहार में प्रवेश करने की सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी तेज कर दी। सुबह करीब 9 से 10:30 बजे के बीच कुल्हड़िया टोल प्लाजा और मनभावन मोड़ के आसपास एक टाटा हैरियर एसयूवी को रोक लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र की इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी निवासी सारस कुमार, फतेहपुर निवासी लल्टू कुमार और सीवान जिले के जीबी नगर थाना क्षेत्र के माधवपुर गांव निवासी चंदन तिवारी के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तीनों अंतरराज्यीय हथियार और कारतूस तस्करी गिरोह से जुड़े हैं।

सीट के नीचे छिपाकर रखे थे हजारों कारतूस, नट-बोल्ट खोलकर हुई तलाशी

पुलिस जब एसयूवी की तलाशी लेने पहुंची तो शुरुआत में कारतूसों की पूरी खेप नहीं मिली। तस्करों ने बेहद चालाकी से कारतूसों को वाहन की सीट के नीचे छिपाकर रखा था। इसके बाद एसटीएफ की टीम ने गाड़ी के नट-बोल्ट खोलकर बारीकी से जांच की। तलाशी के दौरान अलग-अलग बोर के हजारों कारतूस बरामद हुए। इनमें 7.65 एमएम के कारतूस भी शामिल हैं।

इसके अलावा पुलिस ने एक मैगजीन और लोडेड पिस्टल भी जब्त की है। इतनी बड़ी बरामदगी की सूचना मिलने के बाद एसटीएफ के एसपी अंजनी सिंह भी पटना से कोईलवर पहुंचे और आरोपियों से पूछताछ की।

पुलिस को देखकर भागने लगे तस्कर, दो गाड़ियों को मारी टक्कर

पुलिस की घेराबंदी देखकर आरोपियों ने मौके से भागने की कोशिश भी की। बताया गया कि उन्होंने अपनी एसयूवी को पीछे करके निकालने का प्रयास किया। इस दौरान उनकी गाड़ी पीछे आ रही दूसरी हैरियर से टकरा गई। इसके बाद आगे निकलने की कोशिश में सामने से आ रही टाटा नेक्सॉन कार को भी टक्कर मार दी।

इस घटना में दोनों वाहनों को नुकसान पहुंचा, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते तीनों आरोपी भागने में सफल नहीं हो सके। टीम ने उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया और वाहन की तलाशी के बाद कारतूसों की पूरी खेप जब्त कर ली।

मोबाइल और व्हाट्सएप चैट से खुलेगा तस्करी नेटवर्क का राज

अब पुलिस की जांच का सबसे अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी संख्या में कारतूस किसने खरीदे और बिहार में किन लोगों तक उनकी सप्लाई होनी थी। जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट खंगाल रही हैं।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बदायूं में कारतूस किस सप्लायर से खरीदे गए थे और इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना कौन है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी यात्रा के दौरान पुलिस की डिजिटल निगरानी से बचने के लिए मोबाइल फोन और जीपीएस का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। इसके बावजूद एसटीएफ को मिले खुफिया इनपुट के आधार पर उनकी गतिविधियों का पता चल गया।

सदर एसडीपीओ-2 रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपी शातिर अंतरराज्यीय तस्कर हैं। इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल: 19 हजार कारतूस किसे पहुंचाने थे?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्तर प्रदेश से बिहार लाई जा रही इतनी बड़ी खेप के पीछे कौन लोग थे और इसका इस्तेमाल कहां किया जाना था। मुजफ्फरपुर, सीवान, सुपौल और दरभंगा जैसे जिलों में सप्लाई की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। फिलहाल तीन गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन पुलिस की जांच अब इस तस्करी के मुख्य सरगना, सप्लायर और संभावित खरीदारों तक पहुंचने पर केंद्रित है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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