NEET और CUET के बाद अब UGC-NET: NTA के क्वालिटी कंट्रोल पर उठे सवाल, बार-बार रद्द होती परीक्षाएं और NTA की साख
After NEET and CUET, now UGC-NET: Questions raised over NTA's quality control, repeated exam cancellations, and the agency's credibility.

नई दिल्ली: देश की प्रमुख प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर अपनी परीक्षा प्रणाली और गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर विवादों के घेरे में है। ताजा मामले में एजेंसी ने UGC-NET जून 2026 चक्र के तीन प्रमुख विषयों—इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी (समाजशास्त्र)—की परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है।
NTA द्वारा गठित एक विशेष समिति की सिफारिश के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा कराने वाली इस एजेंसी के क्वालिटी कंट्रोल और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों रद्द करनी पड़ीं तीन विषयों की परीक्षाएं
UGC-NET जून 2026 की परीक्षा के दौरान अंग्रेजी, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्न पत्रों को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
- गंभीर त्रुटियां: प्रश्न पत्रों में तथ्यात्मक भूलों के अलावा स्पेलिंग, व्याकरण और अनुवाद (हिंदी-अंग्रेजी रूपांतरण) से जुड़ी बड़ी खामियां सामने आईं।
- प्रश्नों का दोहराव: सबसे चौंकाने वाली बात इंग्लिश के पेपर में देखने को मिली, जहां 150 में से 60 से अधिक प्रश्न पुराने वर्षों के प्रश्न पत्रों से सीधे दोहरा दिए गए थे।
- समिति का फैसला: शिकायतों का संज्ञान लेते हुए NTA की विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा रद्द कर पुनर्मूल्यांकन के बजाय दोबारा परीक्षा (Re-Exam) आयोजित करने की सिफारिश की। NTA ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित अभ्यर्थियों से इसके लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी।
हाल के सालों में विवादों में घिरी प्रमुख परीक्षाएं
प्रश्न पत्रों में गलतियों से लेकर पेपर लीक, तकनीकी खराबी और लॉजिस्टिक की विफलताओं तक, NTA द्वारा आयोजित कई बड़ी परीक्षाएं बीते समय में कटघरे में रही हैं:
1. NEET-UG का बड़ा विवाद
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में पेपर लीक, OMR शीट में हेरफेर और ग्रेस मार्क्स के विवाद सामने आने के बाद मामला सीबीआई (CBI) तक पहुंचा। देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों और कानूनी कार्रवाई के बीच लापरवाही के आरोपी दर्जनों अधिकारियों पर गाज गिरी। लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के करियर से जुड़ी इस परीक्षा में हुई गड़बड़ियों ने पूरी प्रणाली पर भारी दबाव बनाया।
2. CSIR-UGC NET का स्थगन
सुरक्षा चिंताओं और लॉजिस्टिक समस्याओं का हवाला देकर सुरक्षा कारणों से परीक्षा को अंतिम समय में टाल दिया गया था। महीनों से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अंतिम क्षणों में हुए इस बदलाव ने यात्रा व्यवस्था और अध्ययन शेड्यूल को पूरी तरह प्रभावित किया।
3. CUET-UG और PG की तकनीकी खामियां
विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आयोजित सीयूईटी (CUET) कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में होती है। हालांकि, परीक्षा केंद्रों पर सर्वर डाउन होना, सिस्टम का अचानक बंद होना और ऐन वक्त पर परीक्षा केंद्र बदल दिए जाना जैसी समस्याओं से हजारों छात्रों को जूझना पड़ा।
विश्वसनीयता पर खड़े होते बड़े सवाल
लगातार हो रही इन गड़बड़ियों ने यह बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पारदर्शी और त्रुटिहीन परीक्षा कराने का दावा करने वाली एजेंसी के पास मजबूत बुनियादी ढांचा और क्वालिटी चेक मैकेनिज्म मौजूद है? हर बार परीक्षा रद्द होने या टलने का सीधा नुकसान उन लाखों अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है, जो अपना समय, मेहनत और संसाधन इन प्रतियोगी परीक्षाओं में लगाते हैं।









