झारखंड हाईकोर्ट: पति-पत्नी के रिश्ते पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, रिश्ते में विश्वास व सम्मान नहीं, तो साथ रहना अव्यवहारिक, कोर्ट ने दी तलाक की मंजूरी

Jharkhand High Court: The High Court made strong comments on the relationship between husband and wife, stating that living together is impractical if there is no trust and respect in the relationship. The court granted divorce.

झारखंड हाईकोर्ट ने शादी से जुड़े विवाद में बड़ा फैसला देते हुए कहा कि जब रिश्ते में विश्वास और सम्मान खत्म हो जाए, तो उसे जबरन बनाए रखना उचित नहीं। कोर्ट ने पत्नी को तलाक की अनुमति देते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
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रांची: पति-पत्नी के वैवाहिक संबंधों को लेकर एक अहम और संवेदनशील टिप्पणी करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान पर आधारित रिश्ता होता है। यदि यह मूल आधार ही समाप्त हो जाए, तो ऐसे रिश्ते को जबरन बनाए रखना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक। इसी आधार पर कोर्ट ने एक महिला की अपील स्वीकार करते हुए उसे तलाक की अनुमति दे दी।

दरअसल पत्नी ने तलाक की अर्जी दायर की थी। महिला ने अपने पति से तलाक की मांग की थी। इससे पहले जमशेदपुर की फैमिली कोर्ट ने वर्ष 2024 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि पत्नी द्वारा लगाए गए परित्याग (desertion) के आरोप सिद्ध नहीं होते। इस फैसले को चुनौती देते हुए पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और मामले के संवेदनशील पहलुओं को नजरअंदाज किया।

पत्नी ने कोर्ट में बताया कि वर्ष 2014 में विवाह के बाद शुरुआती समय में सब कुछ सामान्य था, लेकिन दो बेटियों के जन्म के बाद पति और ससुराल पक्ष का व्यवहार बदल गया। महिला का आरोप था कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पति द्वारा शराब के नशे में गाली-गलौज करना, मारपीट करना और सास का इस व्यवहार में समर्थन करना, उसकी जिंदगी को असहनीय बना दिया।

कोर्ट ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में पत्नी का अलग रहना ‘परित्याग’ नहीं बल्कि मजबूरी थी। खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि विवाह संबंध तब तक ही सार्थक है, जब तक उसमें आपसी विश्वास और सम्मान बना रहे। जब यह पूरी तरह टूट जाए, तो कानूनी रूप से भी उस रिश्ते को खत्म करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे रिश्ते में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जहां उसकी गरिमा और मानसिक शांति प्रभावित हो रही हो। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने पत्नी को राहत देते हुए विवाह को समाप्त घोषित कर दिया।

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