झारखंड- चार अफसरों पर हाईकोर्ट की गाज: पेंशन भुगतान मामले में अवमानना की कार्रवाई, आदेश नहीं मानने पर प्रधान सचिव समेत 4 अधिकारी पर कार्रवाई, वेतन भी रोका
Jharkhand: High Court takes action against four officers: Contempt action in pension payment case, action taken against four officers including Principal Secretary for disobeying orders, salary withheld

झारखंड हाईकोर्ट ने पेंशन और रिटायरमेंट लाभ के भुगतान में देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के चार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू कर दी है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और तीन अधिकारियों के वेतन पर रोक लगा दी है।
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में लापरवाही बरतने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान सचिव सहित चार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
पूरा मामला रंजीत बिहारी प्रसाद द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट ने 15 जनवरी 2024 को एक स्पष्ट आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 8 सप्ताह के भीतर उनके पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का निर्धारण कर भुगतान किया जाए। हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि संबंधित आदेश के खिलाफ लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की गई है। लेकिन कोर्ट ने पाया कि यह अपील न केवल काफी देरी से दायर की गई, बल्कि उसमें कई तकनीकी त्रुटियां भी थीं, जिन्हें समय रहते दूर नहीं किया गया।
खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रधान सचिव, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश भी दिया है, ताकि वे अपने पक्ष को स्पष्ट कर सकें।
इसके साथ ही अदालत ने तीन अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने का भी आदेश दिया है, जो इस बात का संकेत है कि कोर्ट इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आखिर क्यों न संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। पेंशन जैसे संवेदनशील मामलों में देरी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित अधिकारी कोर्ट के सामने क्या जवाब पेश करते हैं और क्या राज्य सरकार इस मामले में अपनी स्थिति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाती है।









