लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर PM मोदी का खास संदेश, बताईं BJP के दिग्गज नेता की दो बड़ी खूबियां

पूर्व उप प्रधानमंत्री के जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश पर प्रधानमंत्री ने लिखा विशेष आलेख, वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता को बताया उनकी सबसे बड़ी ताकत; अटल-आडवाणी की जोड़ी से लेकर राम मंदिर आंदोलन तक का किया जिक्र।

 

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। इस खास मौके पर पीएम मोदी ने एक विशेष आलेख लिखकर आडवाणी के लंबे राजनीतिक सफर, संगठन निर्माण और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने उनके व्यक्तित्व की दो ऐसी खूबियों का उल्लेख किया, जिन्होंने उन्हें भारतीय राजनीति में अलग पहचान दिलाई। इनमें पहली है उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक तीक्ष्णता, जबकि दूसरी है राजनीतिक मुद्दों पर तथ्यों और तर्कों के साथ अपनी बात रखने की क्षमता।

वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता को बताया बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आलेख में लिखा कि लालकृष्ण आडवाणी की वैचारिक स्पष्टता उनके भाषणों और लेखों में साफ दिखाई देती है। उनकी बौद्धिक क्षमता और सुविचारित राजनीतिक दृष्टिकोण ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। पीएम मोदी ने भारतीय राजनीति में लंबे समय तक प्रचलित रहे कथित छद्म धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर आडवाणी के विचारों और उनके तर्कपूर्ण हस्तक्षेप का भी उल्लेख किया।

अटल-आडवाणी की जोड़ी ने खड़ी की भाजपा की मजबूत नींव

पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की राजनीतिक साझेदारी को भारतीय राजनीति का दुर्लभ उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने दशकों तक बिना किसी प्रतिस्पर्धा के एक-दूसरे के पूरक बनकर काम किया। इस जोड़ी ने जनसंघ को मजबूत करने से लेकर भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

8 नवंबर 1927 को जन्मे आडवाणी ने 1947 के विभाजन के दौरान सिंध में अपना घर और परिचित दुनिया खो दी थी। इसके बावजूद उन्होंने बिना कड़वाहट के नए सिरे से जीवन शुरू किया। संगठन के प्रति समर्पण और मेहनत के दम पर उन्होंने पहले जनसंघ को मजबूत किया और बाद में भाजपा के विस्तार में अहम योगदान दिया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की और 1996 में पहली बार लोकसभा में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी।

आपातकाल में लोकतंत्र की रक्षा के लिए किया संघर्ष

प्रधानमंत्री ने 1975 के आपातकाल को आडवाणी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि उस दौर में आडवाणी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष में सक्रिय रहे। जेल में बिताए अनुभवों को उन्होंने अपनी पुस्तक ‘A Prisoner’s Scrap-Book’ में भी दर्ज किया। पीएम मोदी ने उनके संगठनात्मक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि आरएसएस प्रचारक के रूप में राजस्थान से काम शुरू करने के बाद वह दिल्ली पहुंचे और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ संगठन को आगे बढ़ाया। 1970 में उनकी संसदीय पारी शुरू हुई।

सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा का किया खास जिक्र

पीएम मोदी ने आडवाणी की ऐतिहासिक सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा को भी अपने आलेख में विशेष स्थान दिया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा की योजना तैयार करने से लेकर इसके संचालन तक उन्हें आडवाणी के साथ काम करने का अवसर मिला था। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस यात्रा ने देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श को प्रभावित किया। बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी और उसके बाद भाजपा के राजनीतिक फैसलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के प्रति पार्टी के वैचारिक संकल्प को भी रेखांकित किया।

गृह मंत्री से उप प्रधानमंत्री और भारत रत्न तक का सफर

लालकृष्ण आडवाणी ने 1977 की जनता पार्टी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वह देश के गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री भी बने। पीएम मोदी ने उनके कार्यकाल को याद करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने आडवाणी के निजी व्यक्तित्व की सादगी, अध्ययनशीलता और सांस्कृतिक जुड़ाव की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि आडवाणी को किताबें पढ़ने के साथ सिनेमा और रंगमंच में भी गहरी रुचि रही है। अपनी सिंधी संस्कृति से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहा। पीएम मोदी ने उनकी पत्नी कमला आडवाणी के योगदान को भी याद किया और 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का उल्लेख किया। अंत में प्रधानमंत्री ने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

 

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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