Rajya Sabha Elections: यूपी में BJP का बड़ा दांव, 2 केंद्रीय मंत्री समेत कई दिग्गज बेटिकट; नए चेहरों पर नितिन नवीन ने जताया भरोसा

भाजपा ने यूपी की आठ राज्यसभा सीटों के लिए घोषित किए उम्मीदवार, हरदीप पुरी, बीएल वर्मा और स्मृति ईरानी समेत कई चर्चित नाम सूची से बाहर; सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी की सूची ने कई नेताओं और समर्थकों को चौंका दिया, क्योंकि जिन दिग्गजों के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा थी, उन्हें टिकट नहीं दिया गया। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के साथ नीरज शेखर, बृजलाल, स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी जैसे नाम शामिल हैं।

भाजपा ने इन चर्चित चेहरों की जगह धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है।

दिग्गजों को किनारे कर नए चेहरों पर भरोसा

भाजपा की इस सूची को केवल राज्यसभा चुनाव के टिकट बंटवारे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।

पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव में हार चुके कुछ चर्चित नेताओं को दोबारा राज्यसभा भेजने से दूरी बनाई है। इसी तरह आने वाले समय में विधान परिषद चुनावों में भी नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा है। इससे योगी सरकार के उन मंत्रियों की चिंता बढ़ सकती है, जिनका विधान परिषद का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। यदि उन्हें दोबारा सदन में नहीं भेजा गया तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से यह दावा किया गया है कि राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका रही है। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार चयन के पूरे निर्णय की विस्तृत प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

OBC और दलित चेहरों को मिली खास तवज्जो

भाजपा की आठ उम्मीदवारों वाली सूची में सामाजिक समीकरण का खास ध्यान रखा गया है। पार्टी ने OBC और दलित समाज से आने वाले नेताओं को महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व दिया है। इसके साथ ही सवर्ण समाज के तीन नेताओं को भी टिकट दिया गया है।

राधाकांत ओझा को ब्राह्मण समाज से, राम प्रताप सिंह चौहान को ठाकुर समाज से और गोपी कृष्ण पांडेय को ब्राह्मण समाज से उम्मीदवार बनाया गया है।

वहीं दलित समाज से प्रियंका सिंह रावत और विद्यासागर सोनकर को राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है। OBC वर्ग से धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।

श्रुति गंगवार के नाम ने भी चौंकाया

भाजपा की सूची में श्रुति गंगवार का नाम भी खास चर्चा में है। वह वर्तमान राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी हैं। बरेली-बहेड़ी क्षेत्र में उनकी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता बताई जाती है।

वहीं धर्मपाल सिंह लोधी समाज से आते हैं और योगी सरकार में पशुधन मंत्री हैं। विद्यासागर सोनकर भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में गिने जाते हैं और जौनपुर के रहने वाले हैं। वह मछलीशहर से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं।

प्रकाश पाल भाजपा के पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। पार्टी के संगठनात्मक काम में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

संगठन और कानूनी क्षेत्र के चेहरों को भी मौका

राधाकांत ओझा के जरिए भाजपा ने कानूनी पेशे से जुड़े वरिष्ठ चेहरे को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। वहीं गोपी कृष्ण पांडेय लंबे समय से संगठन में सक्रिय बताए जाते हैं और पार्टी के जमीनी अभियानों से जुड़े रहे हैं।

राम प्रताप सिंह चौहान भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं। वह 2017 से 2022 तक आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं।

इस तरह भाजपा ने राज्यसभा की सूची में संगठन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को एक साथ साधने की कोशिश की है।

निर्विरोध चुनाव की संभावना क्यों बढ़ी?

भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की दस राज्यसभा सीटों पर चुनाव निर्विरोध होने की संभावना भी बढ़ गई है। भाजपा ने नौवां उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इसका एक कारण चुनाव में संभावित क्रॉस वोटिंग से बचना भी हो सकता है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद नौवां उम्मीदवार उतारने के लिए अतिरिक्त वोटों की चुनौती बनी रहती।

बताया जा रहा है कि भाजपा के पास सहयोगी दलों को मिलाकर करीब 294 विधायकों का समर्थन है। इनमें भाजपा के 256 विधायक, अपना दल एस के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक शामिल बताए जाते हैं। इसके अलावा कुछ निर्दलीय और अन्य समर्थक विधायकों का भी समर्थन भाजपा के साथ होने का दावा किया गया है।

भाजपा के पास आठवीं सीट के लिए भी पर्याप्त संख्या नहीं?

राज्यसभा चुनाव के गणित के मुताबिक, 37 वोट प्रति सीट के हिसाब से सात सीटों के लिए 259 विधायकों की जरूरत होगी। इस हिसाब से भाजपा के पास सात सीटें जीतने के बाद भी अतिरिक्त वोट बच सकते हैं, लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे कुछ अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास मिलाकर करीब 103 विधायक बताए जा रहे हैं। सपा के पास तीन उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे दूसरे दलों या असंतुष्ट विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

यही वजह है कि भाजपा और सपा दोनों के लिए अतिरिक्त उम्मीदवार उतारना जोखिम भरा हो सकता है। अगर दोनों पक्ष अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं उतारते हैं तो राज्यसभा की दस सीटों पर आठ भाजपा और दो सपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बन सकती है।

हालांकि, अंतिम तस्वीर नामांकन, नाम वापसी और चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल भाजपा की आठ उम्मीदवारों वाली सूची ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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