Tata Motors की कार खरीदने वालों को लग सकता है बड़ा झटका! फिर बढ़ सकती हैं कीमतें, कंपनी ने बताया क्या है मजबूरी
कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत से मार्जिन पर दबाव, Tata Motors छोटी-छोटी किस्तों में कीमत बढ़ाने पर कर रही विचार; कमर्शियल व्हीकल्स भी अक्टूबर से महंगे होने वाले हैं

नई दिल्ली। अगर आप आने वाले दिनों में Tata Motors की नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके बजट पर असर पड़ सकता है। कच्चे माल की लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण कंपनी के पैसेंजर व्हीकल्स की कीमतों में एक बार फिर इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। कंपनी का कहना है कि बढ़ती लागत का पूरा बोझ एक साथ ग्राहकों पर डालना संभव नहीं है, इसलिए कीमतों में चरणबद्ध तरीके से बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है।
Tata Motors Passenger Vehicles के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शैलेश चंद्रा के मुताबिक कंपनी कमोडिटी की लागत में हुई बढ़ोतरी के बड़े हिस्से को फिलहाल खुद वहन कर रही है। साथ ही कंपनी लागत कम करने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। इसके बावजूद कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।
छोटी-छोटी किस्तों में बढ़ सकती हैं कारों की कीमतें
शैलेश चंद्रा के मुताबिक कंपनी हर महीने लागत और बाजार की स्थिति की समीक्षा कर रही है। जब उचित समय और गुंजाइश दिखाई देगी, तब कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है। हालांकि कंपनी एक साथ बड़ी कीमत बढ़ाने के बजाय छोटी-छोटी किस्तों में दाम बढ़ाने की रणनीति अपना सकती है, ताकि ग्राहकों की मांग पर अचानक बड़ा असर न पड़े।
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जिस तेजी से लागत बढ़ी है, उसी अनुपात में कारों की कीमतें तुरंत बढ़ाना बाजार के लिए आसान नहीं है। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा कंपनी को खुद उठाना पड़ रहा है, जिससे उसके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बन रहा है।
1 सितंबर से पहले ही बढ़ चुकी हैं कीमतें
Tata Motors Passenger Vehicles Limited ने 1 सितंबर से अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में 25,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। कंपनी के अनुसार यह वृद्धि इंटरनल कंबशन इंजन यानी ICE वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर भी लागू की गई है। हालांकि अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से कीमतों में बढ़ोतरी अलग रही है।
अब कंपनी की ओर से आगे भी चरणबद्ध कीमत बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कुछ मॉडल और वेरिएंट पहले की तुलना में महंगे हो सकते हैं।
कमर्शियल व्हीकल्स भी होने वाले हैं महंगे
सिर्फ पैसेंजर कारों पर ही कीमत बढ़ने का दबाव नहीं है। Tata Motors अपने कमर्शियल व्हीकल्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी करने वाली है। कंपनी के मुताबिक कमर्शियल व्हीकल्स की कीमतें 1 अक्टूबर से करीब 1 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएंगी।
इसका असर ट्रक, बस और अन्य कमर्शियल वाहनों की खरीदारी पर पड़ सकता है। कीमत बढ़ने के बाद इन वाहनों की शुरुआती लागत के साथ-साथ व्यवसायों के लिए कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
ऊर्जा, माल ढुलाई और कच्चे माल की लागत बनी चुनौती
कंपनी के सामने लागत बढ़ने की कई वजहें हैं। ऊर्जा, माल ढुलाई और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने ऑटो कंपनियों के लिए लागत का दबाव बढ़ाया है। ऐसी स्थिति में कंपनियों के सामने दो रास्ते होते हैं। या तो बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया जाए या फिर कीमतों में बढ़ोतरी करके उसका कुछ बोझ ग्राहकों पर डाला जाए।
Tata Motors फिलहाल दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। कंपनी लागत घटाने के उपायों पर जोर दे रही है, वहीं बाजार और मांग को देखते हुए कीमतों में धीरे-धीरे बदलाव की रणनीति पर विचार कर रही है।
EV सेगमेंट में भी बढ़ा रही कंपनी अपनी क्षमता
Tata Motors Passenger Vehicles इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग को देखते हुए अपनी उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक उसकी इलेक्ट्रिक कार उत्पादन क्षमता बढ़ाकर प्रति माह 16,000 यूनिट से अधिक कर दी गई है।
भारत में कंपनी की कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत बताई गई है। ऐसे में कंपनी के लिए EV सेगमेंट आने वाले समय में महत्वपूर्ण बना हुआ है।
फिलहाल कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता लागत में आगे होने वाली संभावित बढ़ोतरी को लेकर अनिश्चितता है। कमोडिटी की कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी और लागत का दबाव कितना बढ़ेगा, इसे लेकर स्पष्ट तस्वीर नहीं है। ऐसे में आने वाले महीनों में Tata Motors की कारों की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।









