EV मालिकों की सबसे बड़ी टेंशन खत्म! अब रियल-टाइम में पता चलेगी बैटरी की कमजोरी, वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

The biggest worry for EV owners is over! Battery weaknesses can now be detected in real-time; scientists have discovered a new technology.

नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। सड़कों पर हर दिन नई-नई ईवी गाड़ियां देखने को मिल रही हैं। हालांकि, इसके बावजूद ईवी इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के मन में हमेशा एक डर बना रहता है— ‘कहीं बीच रास्ते में बैटरी धोखा न दे दे?’ या ‘बैट्री कब खराब होगी, इसका पहले से पता कैसे चलेगा?’

​अगर आप भी इसी चिंता में रहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। रिसर्चर्स ने ईवी मालिकों की इस सबसे बड़ी टेंशन का तोड़ निकाल लिया है। वैज्ञानिकों ने एक बेहद एडवांस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) तकनीक डेवलप की है, जो गाड़ी चलते समय ही (रियल-टाइम में) यह बता देगी कि बैटरी के अंदरूनी हिस्से यानी सेल्स कब और कितने कमजोर हो रहे हैं।

​क्या है यह नई तकनीक और कैसे करती है काम?

​वर्तमान में जो इलेक्ट्रिक गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं, उनका बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) सिर्फ वोल्टेज, करंट और तापमान को ऊपर-ऊपर से मापता है। इस पुराने सिस्टम में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि जब तक बैटरी की परफॉर्मेंस पूरी तरह गिर नहीं जाती या वह खराब नहीं हो जाती, तब तक उसके अंदरूनी नुकसान का पता ही नहीं चल पाता।
​वैज्ञानिकों ने इस कमी को दूर करने के लिए इलेक्ट्रोकेमिकल इम्पीडेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (EIS) नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह नया सिस्टम एडवांस सेंसर्स की मदद से बैटरी सेल्स के अंदरूनी इलेक्ट्रॉनिक रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) को सीधे मापता है। इससे बैटरी के अंदर चल रही सटीक और असली कंडीशन की लाइव रिपोर्ट तुरंत मिल जाती है।

​हादसे से पहले ही मिल जाएगा ‘डैमेज अलर्ट’

​इस एडवांस तकनीक को फुलप्रूफ बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने लैब में बैटरी सेल्स को जानबूझकर डैमेज (खराब) किया। इसके बाद उस खराबी से मिले डेटा का बारीकी से अध्ययन करके एक बेहद स्मार्ट एल्गोरिदम (Algorithm) तैयार किया गया।
​अब यह स्मार्ट एल्गोरिदम असली दुनिया में गाड़ी चलाते समय भी बैटरी के अंदर होने वाले छोटे से छोटे नुकसान या अंदरूनी टूट-फूट को तुरंत पकड़ लेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम, आग लगने या शॉर्ट सर्किट जैसी गंभीर स्थिति के आने से पहले ही ड्राइवर के पास ‘डैमेज अलर्ट’ पहुंच जाएगा। इससे बड़ी दुर्घटनाओं को समय रहते आसानी से टाला जा सकेगा।

​न बढ़ेगा वजन, न बदलेगा साइज; सुधरेगी बैटरी की लाइफ

​कई ईवी मालिकों को लग सकता है कि इतने सारे हाई-टेक फीचर्स आने के बाद गाड़ी की बैटरी का साइज या वजन बढ़ जाएगा, जिससे रेंज पर असर पड़ेगा। लेकिन रिसर्चर्स ने साफ कर दिया है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस नए सिस्टम को फिट करने के बाद भी मौजूदा बैटरी पैक के आकार या वजन में 1 ग्राम का भी बदलाव नहीं होगा।
​यह तकनीक बिना कोई अतिरिक्त जगह घेरे, चुपचाप अंदरूनी फिजिकल बदलावों को ट्रैक करेगी। इससे न सिर्फ गाड़ियों की सेफ्टी बढ़ेगी, बल्कि बैटरी की लाइफ-साइकल और उसकी ओवरऑल परफॉर्मेंस भी कई गुना बेहतर हो जाएगी।

कमर्शियल लॉन्च की तैयारी: राहत की बात यह है कि रिसर्चर्स अब इस प्रोजेक्ट को कमर्शियल (व्यावसायिक) लेवल पर लाने की तैयारी कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह एडवांस तकनीक आपकी आने वाली नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इन-बिल्ट देखने को मिलेगी, जिसके बाद ईवी का सफर पूरी तरह टेंशन-फ्री हो जाएगा।

Chauhan

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