1929 के हुकुमनामा से लेकर सरकारी वन भूमि तक… हजारीबाग जमीन मामले में बड़ा फैसला, 6 आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज

Ranchi News: हजारीबाग की सरकारी जमीन को कथित तौर पर वन भूमि बताते हुए उसके हस्तांतरण और बड़े षड्यंत्र से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने छह आरोपियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सभी छह आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

न्यायमूर्ति अनूभा रावत चौधरी की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद वे संबंधित संपत्ति पर अपने अधिकार के दावे के समर्थन में एसीबी के समक्ष पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

इन 6 आरोपियों को नहीं मिली राहत

हाईकोर्ट ने जिन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की है, उनमें राज कुमार प्रजापति, कुलेश्वर प्रजापति, युगेश्वर प्रजापति उर्फ उगेश्वर प्रजापति, रामदेव प्रजापति उर्फ रामदयाल प्रजापति, नेमी चंद प्रजापति और तिलक प्रजापति उर्फ तिलक महतो शामिल हैं।

सभी आरोपी हजारीबाग के नया खाप और मुकुंदगंज क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। मामला हजारीबाग एसीबी थाना कांड संख्या 11/2025 से जुड़ा है।

आरोपियों ने 1929 के हुकुमनामा का दिया हवाला

अदालत में बचाव पक्ष की ओर से दावा किया गया कि संबंधित जमीन उन्होंने वर्ष 1929 में सादा हुकुमनामा के माध्यम से हासिल की थी और तभी से वे इस संपत्ति पर कब्जे में हैं।

बचाव पक्ष ने अपने दावे के समर्थन में वर्ष 2004 की एक किराया रसीद और संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित पारिवारिक वंशावली भी अदालत के सामने रखी।

आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद वे लगातार एसीबी के सामने पेश होते रहे हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं।

एसीबी ने क्यों किया जमानत का विरोध?

वहीं, एसीबी ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। एजेंसी की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों को अपनी जमीन के स्वामित्व के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था।

एसीबी के मुताबिक, आरोपी पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि जिस हुकुमनामा का हवाला दिया जा रहा है, उसमें दर्ज नाम आरोपियों के दावे से मेल नहीं खाते।

सरकारी वन भूमि के हस्तांतरण का आरोप

एसीबी ने अदालत में दावा किया कि मामला सरकारी जमीन, जिसे वन भूमि बताया गया है, के कथित हस्तांतरण से जुड़ा है। एजेंसी ने इसमें बड़े स्तर पर षड्यंत्र की आशंका भी जताई है।

एसीबी के अनुसार, आरोपियों की भूमिका जमीन के कथित हस्तांतरण में सामने आई है। जांच एजेंसी ने यह आशंका भी जताई कि अगर आरोपियों को अग्रिम जमानत दी जाती है तो वे जांच के दौरान जुटाए जाने वाले साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

कोर्ट ने दस्तावेजों पर भी उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद वे एसीबी के समक्ष संपत्ति पर अपने अधिकार को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

अदालत ने यह भी गौर किया कि जिस हुकुमनामा पर आरोपी भरोसा कर रहे हैं, वह अपंजीकृत दस्तावेज है, जबकि अदालत के सामने पेश की गई सबसे पुरानी किराया रसीद वर्ष 2004 की है।

कोर्ट के मुताबिक, आरोपी अभी भी कुछ दस्तावेज जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं सरकारी जमीन के कथित बड़े पैमाने पर हस्तांतरण और षड्यंत्र के आरोपों की जांच अभी जारी है।

अंतरिम राहत भी हुई खत्म

मामले में साक्ष्य एकत्र किए जाने की स्थिति और संभावित रूप से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट ने छहों आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

इसके साथ ही अदालत ने आरोपियों को पहले दी गई अंतरिम राहत भी समाप्त कर दी। अब इस मामले में एसीबी की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और जमीन से जुड़े कौन-कौन से दस्तावेज सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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