ख़ुसखबरी! छात्रों के लिए राहत भरी खबर, यहाँ के प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में मिलेगा आरक्षण और 100% तक फीस माफी, जानिए ड्राफ्ट बिल की 5 बड़ी बातें
Good news! A welcome update for students: private universities here will offer reservation and up to 100% fee waivers—here are 5 key points from the draft bill.

नई दिल्ली: दिल्ली में अब निजी विश्वविद्यालयों (प्राइवेट यूनिवर्सिटी) की स्थापना और संचालन के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी कानूनी ढांचा तैयार होने जा रहा है। दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को ‘दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल’ (Draft Private Universities Bill) के मसौदे को हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले का उद्देश्य राजधानी के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों या विदेश न जाना पड़े।
हालांकि, इस बिल को कानून के रूप में लागू करने से पहले दिल्ली विधानसभा से पारित कराना होगा। प्रस्तावित बिल के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. दिल्ली के छात्रों के लिए 25% आरक्षण
प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली में खुलने वाली प्रत्येक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के हर कोर्स में 25% सीटें दिल्ली के स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित रखी जाएंगी। इन सीटों पर दाखिला दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार होगा। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही शहर में उच्च शिक्षा के व्यापक अवसर मिल सकेंगे।
2. मेधावी व जरूरतमंदों के लिए फीस में छूट
बिल में मेरिट-कम-मीन्स (Merit-cum-Means) स्कॉलरशिप का विशेष प्रावधान किया गया है:
- 5% छात्र: 100% पूरी फीस माफ होगी।
- 10% छात्र: 50% फीस में छूट मिलेगी।
- 10% छात्र: 25% फीस में राहत दी जाएगी।
3. यूनिटरी मॉडल पर करेंगी काम
निजी विश्वविद्यालयों को यूजीसी (UGC) और संबंधित नियामक संस्थाओं के सख्त दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। ये संस्थान यूनिटरी मॉडल पर काम करेंगे—यानी वे किसी अन्य कॉलेज को अपने साथ संबद्ध (Affiliate) नहीं कर सकेंगे। हालांकि, दिल्ली के भीतर ही अपने अतिरिक्त कैंपस, रीजनल सेंटर या स्टडी सेंटर स्थापित करने की अनुमति होगी। फैकल्टी की नियुक्ति भी यूजीसी मानकों के तहत ही होगी।
4. 30 साल की लीज या मालिकाना हक जरूरी
प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए स्पॉन्सरिंग बॉडी को कड़े इंफ्रास्ट्रक्चर मानकों को पूरा करना होगा। संस्थान के पास जमीन का कम से कम 30 वर्षों का मालिकाना हक या लीज होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आधुनिक क्लासरूम, प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी और अन्य आधुनिक शैक्षणिक ढांचा तैयार करना होगा।
5. उच्च शिक्षा मंत्री होंगे ‘विजिटर’
सरकारी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री को इन सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज का ‘विजिटर’ बनाया जाएगा। विजिटर के पास यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगने, निरीक्षण करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जांच का आदेश देने या निर्देश जारी करने का अधिकार होगा। प्रशासनिक ढांचे में चांसलर, वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस और एग्जामिनेशन जैसे पद होंगे।
उच्च शिक्षा के नए युग की शुरुआत
सरकार का मानना है कि इस कदम से दिल्ली में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थानों के आगमन का मार्ग प्रशस्त होगा और शिक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।







