Facebook पर ‘विदेशी हसीना’ की दोस्ती… फिर 68 लाख की ठगी! ऐसे खुला नाइजीरियन साइबर गैंग का राज

लखनऊ: सोशल मीडिया पर विदेशी लड़की की फर्जी प्रोफाइल से दोस्ती करना एक युवक को इतना महंगा पड़ा कि उसके साथ 68 लाख रुपये की साइबर ठगी हो गई। अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों के नाम से फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर भारतीयों को प्रेमजाल में फंसाने वाले कथित नाइजीरियन साइबर गिरोह के एक सदस्य को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान न्वोगु ओबेड ओसिनाची (37) के रूप में हुई है। वह नाइजीरिया के इमो स्टेट का रहने वाला बताया गया है और काफी समय से दिल्ली में अवैध रूप से रह रहा था।
विदेशी लड़की की फोटो… और फिर शुरू हुआ खेल
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी के पास से 11 मोबाइल फोन, एक पासपोर्ट, चार एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप और 34 स्क्रीनशॉट बरामद किए गए हैं।
जांच में इन स्क्रीनशॉट से कथित तौर पर विदेशी महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार करने के सबूत मिले हैं। आरोपी और उसके गिरोह पर कथित तौर पर लोगों को कस्टम अधिकारी बनकर ठगने का भी आरोप है।
‘डोरिस विलियम’ बनकर युवक को फंसाया
मामला लखनऊ के डालीगंज निवासी एक युवक से जुड़ा है। आरोप है कि उसे फेसबुक पर ‘डोरिस विलियम’ नाम की फर्जी प्रोफाइल के जरिए दोस्ती के जाल में फंसाया गया।
धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और युवक को महंगे गिफ्ट, डॉलर और पाउंड भेजने का लालच दिया गया। इसके बाद ठगों ने कहानी में नया मोड़ ला दिया।
कथित तौर पर युवक को बताया गया कि एयरपोर्ट पर उसका गिफ्ट और विदेशी मुद्रा कस्टम अधिकारियों ने पकड़ लिया है। इसके बाद कस्टम चार्ज, इनकम टैक्स और GST के नाम पर अलग-अलग रकम जमा कराने को कहा गया।
युवक इस पूरे झांसे में फंसता चला गया और कथित तौर पर उससे करीब 68 लाख रुपये ठग लिए गए।
पहले दो आरोपी भी हो चुके हैं गिरफ्तार
एसटीएफ के अनुसार, इसी मामले में इससे पहले 15 मई को उचेनवा और 18 जुलाई को ओबसे प्रास्पर नाम के दो नाइजीरियन आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया जा चुका है।
न्वोगु ओबेड ओसिनाची भी इसी मामले में वांछित चल रहा था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर साइबर टीम ने दिल्ली के बुराड़ी थाना क्षेत्र स्थित कमल बिहार में छापेमारी की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
2022 में बिजनेस वीजा पर आया था भारत
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह 2022 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था। उसी साल वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी वह दिल्ली में रह रहा था।
एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह के सदस्य फेसबुक, इंस्टाग्राम और WhatsApp पर विदेशी नागरिकों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इसके बाद भारतीय लोगों से दोस्ती कर उन्हें महंगे गिफ्ट और विदेशी मुद्रा भेजने का लालच दिया जाता था।
जब पीड़ित झांसे में आ जाता था तो कथित तौर पर कस्टम या आयकर अधिकारी बनकर अलग-अलग शुल्क जमा कराने के नाम पर पैसे मांगे जाते थे।
कई राज्यों में फैला हो सकता है नेटवर्क
एसटीएफ को आशंका है कि यह कथित साइबर गिरोह सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं था और देश के दूसरे राज्यों में भी लोगों को अपना शिकार बना सकता है।
अब पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की जांच कर रही है। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक परीक्षण भी कराया जाएगा।
सोशल मीडिया पर विदेशी दोस्ती से रहें सावधान
इस मामले से एक बार फिर साफ होता है कि सोशल मीडिया पर अचानक विदेशी व्यक्ति की दोस्ती, महंगे गिफ्ट या विदेशी मुद्रा भेजने का दावा और उसके बाद कस्टम-टैक्स के नाम पर पैसे मांगना साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।
ऐसी स्थिति में बिना सत्यापन के किसी खाते में पैसे भेजने या निजी जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है।









