अस्पताल में भाई का शव पड़ा रहा… बहन आई, चेहरा देखा और फिर चली गई, अंतिम संस्कार से भी किया इनकार

71 साल के जुगल किशोर की मौत के बाद परिवार से सिर्फ बहन पहुंची, लेकिन कुछ देर बाद अंतिम संस्कार और अस्थियां लेने से भी किया मना; आखिर आश्रम ने निभाया आखिरी फर्ज

कुरुक्षेत्र। भाई-बहन के रिश्ते को खून का सबसे मजबूत रिश्ता माना जाता है, लेकिन हरियाणा के कुरुक्षेत्र से सामने आई एक घटना ने इस रिश्ते की संवेदनशीलता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। 71 वर्षीय जुगल किशोर की मौत के बाद जब उन्हें अंतिम विदाई देने का वक्त आया, तो परिवार की ओर से उनकी छोटी बहन ही अस्पताल पहुंचीं। लेकिन भाई का चेहरा आखिरी बार देखने के कुछ ही देर बाद उन्होंने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाने से इनकार कर दिया।

इतना ही नहीं, बहन ने भाई की मुखाग्नि देने और अस्थियां लेने से भी साफ मना कर दिया। इसके बाद वह एक रिश्तेदार के साथ वापस लौट गईं। आखिरकार जिस आश्रम ने जिंदगी के आखिरी दिनों में जुगल किशोर का सहारा दिया था, उसी ने उनकी अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी भी उठाई।

दिल्ली से पिहोवा तक का सफर, अकेले गुजारे जिंदगी के आखिरी 10 साल

बताया गया कि जुगल किशोर मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर के रहने वाले थे। वह आजीवन अविवाहित रहे और पिछले करीब 10 वर्षों से हरियाणा के पिहोवा में सरस्वती तीर्थ के आसपास सादा जीवन बिता रहे थे।

उनके परिवार के दूसरे सदस्यों के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ सकी। उनकी छोटी बहन पुष्पा रानी ही परिवार की ऐसी कड़ी थीं, जिनसे उनका संपर्क बना हुआ था।

कुछ समय पहले जुगल किशोर की तबीयत बिगड़ गई। उनकी हालत देखकर बाबा फरीद अनाथ आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह उन्हें अपने साथ आश्रम ले आए। इसके बाद पिहोवा के सरकारी अस्पताल में उनका इलाज शुरू कराया गया।

हालत बिगड़ी तो कुरुक्षेत्र किया रेफर, इलाज के दौरान हुई मौत

इलाज के बावजूद जुगल किशोर की सेहत में सुधार नहीं हुआ और उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल रेफर कर दिया।

आश्रम प्रबंधन लगातार उनकी बहन पुष्पा रानी से संपर्क करने की कोशिश करता रहा। इसी बीच 4 सितंबर को इलाज के दौरान जुगल किशोर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

मौत की खबर मिलने के बाद उनकी बहन अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने भाई का चेहरा आखिरी बार देखा, लेकिन अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाने के लिए रुकने को तैयार नहीं हुईं।

बीमारी और समय की कमी का दिया हवाला

आश्रम संचालक के अनुसार, बहन से जब जुगल किशोर के अंतिम संस्कार और अस्थि संचय की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया गया, तो उन्होंने अपनी बीमारी और समय की कमी का हवाला दिया।

इसके बाद उन्होंने भाई के अंतिम संस्कार से जुड़ी पूरी जिम्मेदारी आश्रम प्रबंधन को सौंप दी और अपने एक रिश्तेदार के साथ वहां से चली गईं।

जिस आश्रम ने जिंदगी में संभाला, उसी ने दी आखिरी विदाई

परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी न उठाए जाने के बाद बाबा फरीद अनाथ आश्रम ने जुगल किशोर की अंतिम यात्रा पूरी कराई। आश्रम की ओर से उनका अंतिम संस्कार किया गया और बाद में उनकी अस्थियों का भी विधिवत संचय किया गया।

इस घटना ने अस्पताल में मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। जिस भाई ने जिंदगी का लंबा वक्त अकेले गुजारा, उसकी अंतिम विदाई में भी परिवार का साथ नहीं मिल सका। आखिर में खून के रिश्ते पीछे रह गए और एक आश्रम ने इंसानियत का फर्ज निभाया।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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