गिरिडीह उपचुनाव में JMM-BJP की सीधी चुनौती, JLKM के 10 हजार वोटों पर नजर, सहानुभूति और वापसी के बीच सियासी मुकाबला
दिवंगत विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के बाद उपचुनाव की चर्चा तेज, श्वेता शर्मा के नाम पर अटकलें। भाजपा में निर्भय शाहाबादी समेत कई दावेदारों की चर्चा, जयराम महतो ने JLKM के पूरी ताकत से चुनाव लड़ने का दावा किया।

रांची। झारखंड के गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने के संकेत हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM और भारतीय जनता पार्टी यानी BJP के बीच मुकाबले की चर्चा के साथ झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा यानी JLKM की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं। दिवंगत विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद JMM के सामने अपनी सीट बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा की कोशिश इस सीट पर दोबारा जीत हासिल करने की रहेगी। वहीं, JLKM के पिछले चुनाव में मिले वोट आगामी मुकाबले के समीकरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकते हैं।
हालांकि, सहानुभूति किसे कितनी मिलेगी और किस पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इसका फैसला मतदाता करेंगे। चुनावी नतीजों को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
2024 में 3,838 वोटों से जीते थे सुदिव्य कुमार सोनू
गिरिडीह विधानसभा सीट पर 2024 का चुनाव बेहद करीबी रहा था। चुनाव परिणाम के अनुसार, JMM के सुदिव्य कुमार सोनू को 94,042 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 मत प्राप्त हुए थे। सोनू ने 3,838 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। <Cite refs={[“turn418724search1″,”turn418724search8”]}/>
इस चुनाव में JLKM के उम्मीदवार नवीन आनंद को 10,787 वोट मिले थे, जो कुल मतों का करीब 5.2 प्रतिशत था। <Cite refs={[“turn418724search2″,”turn418724search4”]}/> प्रमुख उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर JLKM को मिले वोटों से कम था। इसी वजह से उपचुनाव की चर्चा में इस पार्टी के संभावित प्रदर्शन को भी अहम माना जा रहा है।
हालांकि, पिछले चुनाव में मिले वोटों को सीधे किसी दूसरी पार्टी के खाते में जुड़ने वाला मानना सही नहीं होगा। उपचुनाव में उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की पसंद जैसे कई कारक असर डाल सकते हैं।
JMM में श्वेता शर्मा के नाम की चर्चा
दिवंगत विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनकी पत्नी श्वेता शर्मा को JMM का संभावित उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह चुनावी गतिविधियों में सक्रिय हैं और दिवंगत विधायक के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कह रही हैं। हालांकि, उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
JMM के लिए यह चुनाव संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। पार्टी की कोशिश होगी कि दिवंगत विधायक के साथ जनता के जुड़ाव को अपने पक्ष में समर्थन में बदल सके। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन की भूमिका भी चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा में रह सकती है।
लेकिन सहानुभूति अपने आप में जीत की गारंटी नहीं होती। मतदाताओं का रुख स्थानीय समस्याओं, उम्मीदवार की स्वीकार्यता, सरकार के कामकाज और चुनावी मुद्दों से भी प्रभावित हो सकता है।
भाजपा में उम्मीदवार चयन पर नजर
गिरिडीह उपचुनाव को लेकर भाजपा ने भी तैयारी शुरू करने की बात कही है। संभावित दावेदारों में पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी और रवींद्र राय समेत अन्य नामों की चर्चा है। हालांकि, पार्टी की ओर से अंतिम उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
भाजपा के सामने उम्मीदवार चयन के साथ संगठन के भीतर तालमेल बनाए रखने और अलग-अलग मतदाता वर्गों तक पहुंच बनाने की चुनौती होगी। 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी बहुत कम अंतर से पीछे रह गई थी। ऐसे में आगामी उपचुनाव में उसकी रणनीति, स्थानीय मुद्दों पर अभियान और उम्मीदवार की छवि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी के हवाले से बताया गया है कि पार्टी उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगी। उनके अनुसार, प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में चुनाव को लेकर चर्चा हुई है और उम्मीदवार के नाम पर केंद्रीय चुनाव समिति फैसला करेगी। उन्होंने सभी घटक दलों को साथ लेकर चुनाव लड़ने की बात भी कही है।
BJP और AJSU के तालमेल पर भी रहेंगी नजरें
गिरिडीह के चुनावी समीकरण में भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी की भूमिका भी चर्चा का विषय है। रिपोर्ट के मुताबिक, आजसू अपनी रणनीति को लेकर फिलहाल इंतजार की स्थिति में है। 11 अक्टूबर को पार्टी ने गिरिडीह के पीरटांड़ स्थित जमुआ मैदान में जनसंवाद और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया था। गिरिडीह के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की सक्रियता का भी उल्लेख किया गया है।
उपचुनाव में भाजपा और आजसू के बीच तालमेल किस रूप में सामने आता है, यह आगे की राजनीतिक गतिविधियों से स्पष्ट होगा। सहयोगी दलों के बीच समन्वय और स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता चुनाव प्रचार की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
जयराम महतो का दावा, पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी JLKM
JLKM के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो ने कहा है कि उनकी पार्टी गिरिडीह उपचुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरेगी। उनके मुताबिक, पंचायत स्तर तक कार्यकर्ताओं से संपर्क किया जा रहा है और संगठन को मजबूत करने के साथ चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।
जयराम महतो ने दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार गिरिडीह सीट पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगी। हालांकि, पार्टी के पिछले प्रदर्शन के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि उपचुनाव में उसे कितने वोट मिलेंगे या उसका प्रदर्शन किस तरह रहेगा।
2024 में JLKM को मिले 10,787 वोट इस सीट के पिछले चुनावी गणित का अहम हिस्सा थे। इस बार पार्टी कितने मतदाताओं तक पहुंच बना पाती है और उसके उम्मीदवार को कितना समर्थन मिलता है, यह चुनावी मुकाबले को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सहानुभूति, उम्मीदवार और गठबंधन बनेंगे चर्चा के केंद्र
गिरिडीह उपचुनाव को लेकर JMM, भाजपा और JLKM की रणनीतियों पर नजर रहेगी। JMM के सामने अपनी सीट बरकरार रखने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा पिछले चुनाव में मिली हार के बाद मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर, JLKM अपने संगठन और पिछले चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर मैदान में उतरने की तैयारी का दावा कर रही है।
आजसू की भूमिका, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे और चुनाव प्रचार की दिशा भी मुकाबले के प्रमुख पहलू होंगे। अंततः मतदाताओं का फैसला ही तय करेगा कि उपचुनाव में किस पार्टी को समर्थन मिलता है।









