Ground Report: जंतर-मंतर पर कफन ओढ़कर उतरा NSUI, गांधी के रूप में दिखा मूक प्रदर्शनकारी; CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अनोखा विरोध
NSUI ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का आरोप; दूसरी ओर गांधी की वेशभूषा में युवक ने 'Money Strike' के जरिए चुनावी खर्च पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कफन ओढ़कर चुनाव आयोग और CEC के खिलाफ नारेबाजी की और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
इस प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर पर विरोध का एक अलग अंदाज भी नजर आया। महात्मा गांधी की वेशभूषा में एक मूक युवक सड़क किनारे खड़ा होकर अपना संदेश लोगों तक पहुंचाता दिखाई दिया। वह न तो नारे लगा रहा था और न ही भाषण दे रहा था, बल्कि लिखे हुए संदेश और बैनर के जरिए चुनाव व्यवस्था में बदलाव और चुनावी खर्च को लेकर अपनी बात रख रहा था।
कफन ओढ़कर NSUI ने क्या संदेश दिया?
NSUI कार्यकर्ताओं का कफन ओढ़कर प्रदर्शन प्रतीकात्मक था। प्रदर्शनकारियों ने इसे लोकतंत्र और वोट के अधिकार के लिए संघर्ष का संदेश बताया। संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाने वाले लोगों की आवाज दबाई जा रही है।
NSUI ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे उसके कुछ कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। संगठन का आरोप है कि वोट के अधिकार से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है।
संगठन ने यह भी कहा कि वह अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा और वोट के अधिकार तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाता रहेगा।
जंतर-मंतर पर गांधी के रूप में दिखा मूक प्रदर्शनकारी
NSUI के नारेबाजी वाले प्रदर्शन से अलग जंतर-मंतर पर महात्मा गांधी की वेशभूषा में नजर आए एक युवक ने लोगों का ध्यान खींचा। युवक ने मौन रहकर विरोध का रास्ता अपनाया और अपनी बात लिखकर लोगों तक पहुंचाई।
Oneindia Hindi की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, जब युवक से उसके प्रदर्शन की वजह पूछी गई तो उसने लिखकर बताया कि वह चुनाव खर्च को खत्म करने और मतदान व्यवस्था में बदलाव की कोशिश करना चाहता है।
उसके पास एक बैनर भी था, जिस पर ‘Money Strike’ का संदेश लिखा हुआ था। इस संदेश के जरिए उसने चुनाव में होने वाले खर्च और कथित रूप से उसके दुरुपयोग पर सवाल उठाया।
‘Money Strike’ के जरिए चुनावी खर्च पर निशाना
गांधी की वेशभूषा, मौन प्रदर्शन और ‘Money Strike’ के बैनर ने जंतर-मंतर पर विरोध का एक अलग रूप सामने रखा। जहां NSUI कार्यकर्ता नारेबाजी और कफन ओढ़कर CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, वहीं यह युवक गांधीवादी तरीके से चुनावी व्यवस्था और चुनाव खर्च को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहा था।
उसके प्रदर्शन का केंद्र किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नारेबाजी के बजाय चुनावी प्रक्रिया में सुधार और चुनावी खर्च से जुड़ा सवाल था। यही वजह रही कि जंतर-मंतर पर एक ही समय में विरोध के दो बिल्कुल अलग अंदाज दिखाई दिए।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों प्रदर्शन?
NSUI का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर संगठन की राजनीतिक और चुनावी प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के बीच हुआ। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे की मांग उठाई और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
NSUI का आरोप है कि चुनाव और वोट के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर जवाब देने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों और संगठन के आरोप हैं और इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में भी हुई सुनवाई
जंतर-मंतर पर यह विरोध ऐसे समय हुआ, जब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले और फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर सुनवाई हुई। ऐसे में राजधानी में चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर हुआ प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया।
एक तरफ अदालत में चुनाव से जुड़े कानूनी सवालों पर सुनवाई हुई, तो दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर छात्र संगठन और अन्य प्रदर्शनकारी अपने-अपने तरीके से चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते दिखाई दिए।
जंतर-मंतर का सोमवार का प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि यहां विरोध के दो अलग-अलग चेहरे नजर आए। एक तरफ NSUI ने कफन ओढ़कर और नारेबाजी के जरिए लोकतंत्र तथा वोट के अधिकार की लड़ाई का संदेश देने की कोशिश की, तो दूसरी तरफ गांधी की वेशभूषा में एक युवक ने मौन रहकर ‘Money Strike’ के जरिए चुनावी खर्च और व्यवस्था में सुधार का मुद्दा उठाया। इन दोनों प्रदर्शनों ने राजधानी में चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक बहस को एक अलग तस्वीर जरूर दे दी।







