झारखंड शिक्षक भर्ती : सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट की JSSC की फटकार, TET सर्टिफिकेट को लेकर हुआ था विवाद, हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश…

Jharkhand Teacher Recruitment: High Court reprimands JSSC in the Assistant Professor appointment case, there was a dispute regarding TET certificate, High Court gave this order...

झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में JSSC को फटकार लगायी है। हाईकोर्ट ने आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है और याचिकाकर्ता के लिए एक सीट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
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झारखंड। सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट ने तीखे तेवर दिखाये हैं। नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करे और साथ ही याचिकाकर्ता के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक पद सुरक्षित रखा जाए।

TET प्रमाणपत्र बना विवाद की जड़
यह मामला याचिकाकर्ता विनोद कुमार साहू द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। इस पर सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने पक्ष रखते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके पास शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के दो प्रमाणपत्र हैं।

वर्ष 2013 में उन्होंने 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे, जबकि 2016 में आयोजित परीक्षा में उनके अंक 60 प्रतिशत से कम रहे।आरोप है कि JSSC ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान 2016 के कम अंकों वाले प्रमाणपत्र को आधार मान लिया, जबकि 2013 का बेहतर प्रदर्शन नजरअंदाज कर दिया गया। यह तब हुआ जब याचिकाकर्ता दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया में सफल भी हो चुके थे।

नियमों में बदलाव के बावजूद नहीं मिली नियुक्ति
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पहले TET प्रमाणपत्र की वैधता केवल पांच वर्षों तक सीमित थी, लेकिन वर्ष 2022 में नियमों में संशोधन कर इसे आजीवन मान्य कर दिया गया। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को नियुक्ति नहीं दी गई।और भी महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिकाकर्ता के अंक अनारक्षित श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक बताए जा रहे हैं, फिर भी उन्हें चयन सूची में स्थान नहीं दिया गया।

कोर्ट का सख्त रुख
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने JSSC को आठ सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सहायक आचार्य के एक पद को याचिकाकर्ता के लिए सुरक्षित रखा जाए, ताकि अंतिम निर्णय आने तक उनके अधिकार प्रभावित न हों।

भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने राज्य में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत की सख्ती से यह संकेत भी मिलता है कि यदि आयोग संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो आगे और कड़े निर्देश जारी हो सकते हैं।अब सभी की नजर JSSC के जवाब पर टिकी है। यह मामला न केवल एक अभ्यर्थी के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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