झारखंड: स्कूली बच्चों से जुड़ी डरावनी रिपोर्ट, स्कूलों में हुई जांच में अधिकांश बच्चों की आंखों में आयी खराबी, डाक्टरों ने किया सावधान…
Jharkhand: Horrifying report related to school children, most of the children found eye problems in the tests conducted in schools, doctors warned...

Jharkhand News : झारखंड में स्कूली बच्चों से जुड़ी एक डरावनी रिपोर्ट आयी है। जांच में खुलासा हुआ है कि अधिकांश स्कूली बच्चों की आंखों में समस्याएं हो रही है। सरायकेला-खरसावां जिले में जिला अंधापन नियंत्रण समिति द्वारा किए गए सर्वे में जो जानकारी आयी है, वो हर माता-पिता को सावधान करने वाला है।
जांच में सामने आया है कि स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की आंखों को नुकसान पहुंचा रहा है। 55,000 से अधिक बच्चों की जांच में हजारों में आंखों की समस्याएं पाई गईं। ये समस्याएं ज्यादातर मोबाइल और टीवी की लत की वजह से सामने आयी है।
आज के दौर में स्मार्टफोन पढ़ाई, मनोरंजन और जानकारी का सबसे आसान साधन मोबाइल है। लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल का सबसे बड़ा खामियाजा अब बच्चों की आंखों को उठाना पड़ रहा है। सरायकेला-खरसावां जिले में हुए एक बड़े सर्वे ने इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया है।
जिला अंधापन नियंत्रण समिति की ओर से किए गए इस सर्वे में जिले के 55,256 छात्रों की आंखों की जांच की गई। इस जांच में सामने आया कि करीब 1,000 से ज्यादा बच्चों की आंखों में गंभीर समस्याएं पाई गईं। इनमें सूखापन, जलन, दर्द, धुंधला दिखना और नजर कमजोर होना प्रमुख हैं।
स्मार्टफोन की लत और आंखों का खतरा
डाक्टरों के मुताबिक स्मार्टफोन से निकलने वाला विकिरण बच्चों की आंखों को सीधे नुकसान पहुंचाता है। लगातार स्क्रीन पर देखने से आंखों की ब्लिंकिंग रेट सामान्य 15-16 से घटकर केवल 6-7 रह जाता है। इसके चलते आंखों में सूखापन आता है और बच्चों को जलन, खुजली तथा धुंधला दिखने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
डॉ. बारा ने चेतावनी दी कि बच्चों की आंखों का नंबर तेजी से बढ़ रहा है। खासकर रात में मोबाइल का उपयोग और अधिक खतरनाक है, क्योंकि इससे रेटिना पर सीधा असर पड़ता है और धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर हो जाती है।
जांच में सामने आए तथ्य
सर्वे के दौरान 808 प्रशिक्षित शिक्षकों और छह नेत्र सहायकों ने बच्चों की आंखों की जांच में सहयोग किया। इसमें पाया गया कि मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बड़ी संख्या में बच्चों की आंखों पर असर पड़ा है।
जिन बच्चों की दृष्टि कमजोर पाई गई, उनकी आगे विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराई गई। इनमें से 640 बच्चों को चश्मा लगाना अनिवार्य पाया गया, जबकि 350 से अधिक छात्रों को दवाइयों से इलाज दिया जा रहा है।
मुफ्त चश्मा और इलाज
जिला अंधापन नियंत्रण समिति के लेखा प्रबंधक घनपत महतो ने बताया कि 640 बच्चों को मुफ्त में चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली समस्याएं दूर होंगी।यह सर्वे स्पष्ट करता है कि बच्चों में स्मार्टफोन की लत एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और समय-समय पर आंखों की जांच करानी चाहिए।








