Jharkhand Education: झारखंड के 179 हाईस्कूलों पर लटकी मान्यता की तलवार! नियम पूरे नहीं किए तो रुक सकता है सरकारी अनुदान

एकीकृत बिहार के समय से चल रहे 158 स्कूलों समेत 179 हाईस्कूलों को अब तय मानकों के तहत मान्यता लेना जरूरी होगा। जमीन, भवन, लैब और शिक्षकों से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं होने पर अनुदान की प्रक्रिया अटक सकती है।

रांची। झारखंड में वर्षों से अस्थायी मान्यता या स्थापना अनुमति के आधार पर संचालित हो रहे हाईस्कूलों के लिए अब बड़ी चुनौती सामने आ गई है। राज्य के 179 हाईस्कूलों को निर्धारित नियमों के तहत मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर अगले वित्तीय वर्ष में मिलने वाला सरकारी अनुदान प्रभावित हो सकता है।

इनमें 158 हाईस्कूल ऐसे हैं, जिन्हें एकीकृत बिहार के समय से स्थापना अनुमति मिली हुई है। इन स्कूलों के लिए झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति नियमावली-2008 के तहत मान्यता लेना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2008 से पहले अस्थायी मान्यता प्राप्त 21 अन्य स्कूलों को भी एक वर्ष के भीतर मान्यता की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस तरह कुल 179 स्कूलों के लिए मान्यता हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

जैक से मांगी गई अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने मार्च में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) के सचिव को पत्र भेजकर संबंधित स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा था।

अब निदेशालय ने जैक से इन स्कूलों के मामलों में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। विभाग का उद्देश्य मान्यता प्रक्रिया पूरी कराकर अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकारी अनुदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।

जमीन से लेकर भवन तक, कई शर्तें पूरी करना जरूरी

मान्यता हासिल करने के लिए स्कूलों को झारखंड माध्यमिक विद्यालय स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति नियमावली-2008 में निर्धारित कई मानकों को पूरा करना होगा।

नियम के मुताबिक:

  • ग्रामीण क्षेत्र में स्कूल के नाम पर कम से कम 2 एकड़ निबंधित जमीन होनी चाहिए।
  • शहरी क्षेत्र में कम से कम 50 डिसमिल भूमि जरूरी है।
  • 30 वर्ष की निबंधित लीज वाली जमीन भी मान्य हो सकती है।

यानी स्कूलों को केवल पढ़ाई संचालित करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित भौतिक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।

200 विद्यार्थियों के लिए 7 कमरे और 3 लैब जरूरी

मान्यता के लिए स्कूल भवन में 200 विद्यार्थियों के लिए कम से कम सात कमरे होना जरूरी है। प्रत्येक कमरे का क्षेत्रफल कम से कम 450 वर्गफीट निर्धारित किया गया है।

इन सात कमरों में चार कक्षाएं और तीन प्रयोगशालाएं शामिल होना आवश्यक है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त संख्या में बेंच-डेस्क की व्यवस्था भी करनी होगी।

प्रधानाध्यापक समेत 14 शिक्षक जरूरी

मान्यता की एक अहम शर्त शिक्षकों की संख्या और योग्यता से जुड़ी है। स्कूल में प्रधानाध्यापक समेत कुल 14 शिक्षक होना जरूरी है।

साथ ही सभी शिक्षकों के लिए बीएड की योग्यता अनिवार्य रखी गई है। इसके अलावा विद्यालय के पुस्तकालय में कम से कम 30 हजार रुपये मूल्य की किताबें उपलब्ध होनी चाहिए।

प्रयोगशाला में जरूरी उपकरण और विद्यार्थियों के लिए खेल सामग्री की व्यवस्था भी मान्यता के लिए जरूरी शर्तों में शामिल है।

मान्यता नहीं मिली तो अनुदान पर असर

शिक्षा विभाग के इस फैसले से लंबे समय से अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित स्कूलों को अब अपनी व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप करना होगा।

मान्यता मिलने के बाद ही सरकारी अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। ऐसे में 179 स्कूलों के प्रबंधन के सामने अब जमीन, भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और शिक्षकों से जुड़ी शर्तों को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

विभाग की कार्रवाई से यह साफ है कि अब केवल वर्षों पुरानी स्थापना अनुमति या अस्थायी मान्यता के आधार पर स्कूलों का संचालन जारी रखना पर्याप्त नहीं होगा।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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