Ranchi News: घर में बोरवेल कराने की सोच रहे हैं तो पहले पढ़ लें ये नियम! बिना अनुमति ड्रिलिंग पर ₹1 लाख जुर्माना, बोरिंग भी होगी सील

रांची में भूजल के गिरते स्तर को देखते हुए नगर निगम ने बोरवेल और ट्यूबवेल को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। घरेलू बोरिंग के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी, जबकि बिना अनुमति बोरिंग कराने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

रांची। राजधानी रांची में अगर आप अपने घर या व्यावसायिक परिसर में बोरवेल या ट्यूबवेल कराने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए रांची नगर निगम ने बोरिंग को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं। अब मनमाने तरीके से बोरिंग कराना आसान नहीं होगा। बोरिंग शुरू कराने से पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

नए प्रावधानों के तहत घरेलू इस्तेमाल के लिए अधिकतम 4 इंच व्यास की बोरिंग ही मान्य होगी। इतना ही नहीं, जिस भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था नहीं होगी, वहां घरेलू बोरिंग की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

बिना अनुमति बोरिंग कराई तो बोरिंग होगी सील

नगर निगम ने साफ कर दिया है कि निजी जमीन के अलावा सड़क, सरकारी जमीन, नदी या नाले की जमीन पर बोरिंग नहीं कराई जा सकती। नियमों का उल्लंघन कर बोरिंग कराने पर भवन मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बिना पूर्व अनुमति बोरिंग कराने पर आवासीय भवन के लिए 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं व्यावसायिक बोरिंग के मामले में 1 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर अवैध बोरिंग को सील भी किया जाएगा।

पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग, उसके बाद बोरिंग की अनुमति

भूजल संरक्षण को लेकर नगर निगम ने बोरिंग की अनुमति को वर्षाजल संचयन से जोड़ दिया है। जिस भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा है, वहां पहले इसकी व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद ही घरेलू बोरिंग की अनुमति मिल सकेगी।

नगर निगम का मानना है कि शहर में लगातार बढ़ती बोरिंग के कारण भूजल पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है, जब कई इलाकों में जलसंकट गंभीर हो जाता है।

बोरिंग कितनी गहरी होगी, यह भी तय होगा

घरेलू ड्रिल बोरिंग की अधिकतम गहराई इलाके के भूगर्भ जलस्तर के आधार पर निर्धारित की जाएगी। बोरिंग कराने के बाद आवेदक को उसकी गहराई और जलस्तर की जानकारी नगर निगम को उपलब्ध करानी होगी।

आवेदन के दौरान पहचान पत्र, होल्डिंग रसीद, GPS फोटो समेत जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।

अनुमति मिलने के बाद सिर्फ 15 दिन का समय

नगर निगम से अनुमति मिलने के बाद बोरिंग का काम 15 दिनों के भीतर पूरा कराना होगा। निर्धारित अवधि में काम शुरू या पूरा नहीं कराने पर अनुमति स्वत: रद्द मानी जाएगी। हालांकि विशेष परिस्थितियों में समय सीमा के बाद अनुमति देने का प्रावधान रखा गया है।

घर और कारोबार के लिए अलग-अलग शुल्क

नए नियमों के तहत आवासीय भवनों के लिए बोरिंग अनुमति शुल्क क्षेत्रफल के हिसाब से तय किया गया है।

  • 0 से 5000 वर्गफीट तक: ₹2,500
  • 5000 वर्गफीट से अधिक: ₹5,000

वहीं व्यावसायिक भवनों के लिए शुल्क अलग होगा।

  • 0 से 1000 वर्गफीट तक: ₹10,000
  • 1000 वर्गफीट से अधिक: ₹10 प्रति वर्गफीट

नगर आयुक्त की दो टूक—नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई

नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि बोरिंग को लेकर नगर निगम के नियम प्रभावी हैं और लोगों को अनुमति लेने के बाद ही बोरिंग करानी चाहिए। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर जुर्माना लगाने के साथ अवैध बोरिंग को सील भी किया जा सकता है।

नगर निगम के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य बोरिंग पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि भूजल के अनियंत्रित दोहन को नियंत्रित करना और रांची के जलस्रोतों को सुरक्षित रखना है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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