झारखंड : हे भगवान ! स्वास्थ्य विभाग की लेडी अफसर की ही डाक्टर की लापरवाही से हो गयी मौत, स्वास्थ्यकर्मियों ने खोला मोर्चा, सिविल सर्जन ने बनायी जांच टीम
Jharkhand: Oh my god! A female health department officer died due to the negligence of her own doctor. Health workers launched a protest, and the civil surgeon formed an investigation team.

रांची। राजधानी रांची में स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार मामला और भी चौंकाने वाला है, क्योंकि आरोप है कि इलाज में लापरवाही की शिकार खुद स्वास्थ्य विभाग की एक अधिकारी बन गईं।
रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत कुम्हारिया की कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) प्रतिमा कुमारी की सदर अस्पताल में डिलीवरी के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद राज्यभर के सीएचओ में भारी आक्रोश है।
सदर अस्पताल में डिलीवरी के दौरान इलाज में कथित लापरवाही से कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर प्रतिमा कुमारी की मौत हो गई। इस घटना से राज्यभर के सीएचओ आक्रोशित हैं और उच्चस्तरीय जांच व दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रसव के दौरान इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शनिवार को रांची जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में महिला सीएचओ रांची सदर अस्पताल पहुंचीं।
उन्होंने सिविल सर्जन से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और इलाज में कोताही बरतने वाली महिला चिकित्सक पर सख्त कार्रवाई की मांग की।झारखंड राज्य सीएचओ संघ की प्रदेश अध्यक्ष सोनी प्रसाद ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल के गायनी विभाग में लगातार लापरवाही की शिकायतें मिलती रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष भी कांके प्रखंड की एक नर्स की इलाज के दौरान इसी तरह मौत हो गई थी, लेकिन उस समय भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बिना परिजनों की अनुमति के ऑपरेशन का आरोप
सीएचओ संघ की प्रदेश अध्यक्ष सोनी प्रसाद ने बताया कि प्रतिमा कुमारी माइल्ड डिलीवरी पेन के साथ रांची सदर अस्पताल पहुंची थीं। इसके बावजूद अस्पताल में समुचित जांच और व्यवस्था के बजाय उन्हें अल्ट्रासोनोग्राफी के लिए बगल के एक निजी अस्पताल भेजा गया।
इसके बाद एक यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा गया। आरोप है कि इसी बीच बिना परिजनों की अनुमति और सहमति लिए प्रतिमा का ऑपरेशन कर दिया गया।
सोनी प्रसाद ने कहा कि ऑपरेशन के बाद जब स्थिति गंभीर हो गई, तब उन्हें रिम्स रेफर किया गया। वहां इलाज के दौरान प्रतिमा कुमारी की मौत हो गई। सीएचओ संघ का कहना है कि अगर समय पर सही निर्णय लिया जाता और परिजनों को पूरी जानकारी दी जाती, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
सिविल सर्जन ने गठित की जांच समिति
इस पूरे मामले को लेकर सीएचओ संघ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रतिमा कुमारी की मौत से वे स्वयं बेहद मर्माहत हैं। उन्होंने इस मामले को ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ बताया।
डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, अल्ट्रासोनोग्राफी रिपोर्ट में प्रतिमा का मामला ‘प्लेसेंटा एक्रीटा’ का सामने आया था। लेकिन ऑपरेशन के दौरान यह स्थिति और भी जटिल निकली। उन्होंने बताया कि प्लेसेंटा गर्भाशय के अंदर गहराई तक घुसा हुआ था और उसका विस्तार यूरिनरी ब्लैडर तक हो गया था, जो कि अत्यंत दुर्लभ स्थिति है।
उन्होंने दावा किया कि तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन जब मामला मल्टी ऑर्गन फेलियर तक पहुंच गया, तब गाइडलाइन के अनुसार मरीज को रिम्स रेफर किया गया।सिविल सर्जन ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार करते हुए कहा कि फिर भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक जांच समिति गठित की गई है।
जांच समिति में प्रतिनिधित्व की मांग
सीएचओ संघ से जुड़ी दर्जनों महिला कर्मियों ने सदर अस्पताल पहुंचकर मृतका के इलाज से जुड़े सभी मेडिकल कागजात उपलब्ध कराने की मांग की। संघ का कहना है कि प्रथम दृष्टया इलाज में गंभीर कोताही नजर आ रही है। उन्होंने मांग की है कि जो भी जांच समिति बनाई जाए, उसमें सीएचओ संघ का भी एक प्रतिनिधि शामिल किया जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।









