झारखंड शिक्षकों पर संकट: 1999-2003 के बीच नियुक्त शिक्षकों पर लटकी तलवार, TET अनिवार्यता को लेकर राहत की गुंजाइश नहीं, बीएडधारी शिक्षक फॉर्म भरने से भी वंचित
Jharkhand teachers face crisis: Teachers appointed between 1999 and 2003 face a threat, with no respite for the TET requirement, and B.Ed. holders barred from filling out forms.

Jharkhand Teacher News : झारखंड में हजारों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। TET अनिवार्यता को लेकर ना तो सरकार ने कोई संकेत दिया है और ना ही सुप्रीम कोर्ट राहत देने के मूड में दिख रहा है। 1999 और 2003 में नियुक्त सरकारी शिक्षकों पर जेटेट पास करने की अनिवार्यता लागू होने से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। चिंता की बात ये है कि बीएड योग्यताधारी कई शिक्षक जेटेट फॉर्म भरने से भी वंचित हो रहे हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के वैसे शिक्षक जिनकी नियुक्ति वर्ष 1999 में बीपीएससी और वर्ष 2003 में जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षा के आधार पर हुई थी, अब उन पर जेटेट (JTET) पास करने की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। इस फैसले के बाद वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।
आपको बता दें कि, हाल ही में 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी पास करना अनिवार्य है। इस आदेश के बाद विभिन्न राज्यों में कार्यरत पुराने शिक्षकों पर भी पात्रता परीक्षा की बाध्यता लागू होने लगी है।
हालांकि इस फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, झारखंड और बिहार समेत कई राज्यों की सरकारों और शिक्षक संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं।झारखंड में स्थिति इसलिए और जटिल हो गई है क्योंकि वर्ष 2003 में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा निकाले गए शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन में शिक्षक बनने के लिए दो वर्षीय शिक्षक प्रशिक्षण डिप्लोमा या बीएड की योग्यता निर्धारित की गई थी।
उस समय उम्मीदवारों ने विज्ञापन की शर्तों के अनुसार आवेदन किया, परीक्षा दी और चयनित होकर सरकारी शिक्षक बने। अब करीब 25 से 30 वर्षों बाद उन्हीं शिक्षकों पर जेटेट पास करने की बाध्यता लागू होने से भारी असंतोष देखा जा रहा है।राज्य में वर्तमान में प्राथमिक शिक्षक वर्ग पहली से पांचवीं तक और टीजीटी यानी ट्रेंड ग्रेजुएट शिक्षक छठवीं से आठवीं तक पढ़ा रहे हैं।
झारखंड में पिछले नौ वर्षों से जेटेट परीक्षा आयोजित नहीं हुई थी। अब सरकार ने जेटेट परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है और आवेदन की अंतिम तिथि 21 मई निर्धारित की गई है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि वर्तमान में जारी जेटेट फॉर्म में पहली से पांचवीं तक के लिए केवल दो वर्षीय डिप्लोमा धारकों को पात्र माना गया है। बीएड उत्तीर्ण शिक्षकों को इस श्रेणी में आवेदन करने योग्य नहीं माना गया है।
ऐसे में वे शिक्षक, जिन्हें वर्ष 2003 में बीएड योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिली थी, अब परीक्षा फॉर्म तक नहीं भर पा रहे हैं।शिक्षकों का कहना है कि जब सरकार ने उन्हें निर्धारित नियमों और योग्यता के आधार पर नियुक्त किया था, तो अब वर्षों बाद नियम बदलकर उन पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
उनका तर्क है कि यदि नौकरी बचाने के लिए जेटेट अनिवार्य किया गया है, तो कम से कम बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जेटेट के नियमों में संशोधन कर बीएडधारी शिक्षकों को भी पहली से पांचवीं कक्षा के लिए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो हजारों कार्यरत शिक्षकों की नौकरी संकट में पड़ सकती है।









