झारखंड- दो बच्चों की नरबलि : मोबाइल रिचार्ज कराने निकले थे दो बच्चे, पकड़कर दोनों बच्चों की दे गयी थी बलि, 7 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला
Jharkhand - Human sacrifice of two children: Two children had gone out to get their mobile phones recharged, but were captured and sacrificed. The court delivered its verdict after 7 years.

Jharkhand Court News : दो बच्चों की नरबलि मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सुनील उरांव को उम्रकैद की सजा दी है। साथ ही विभिन्न धाराओं में कुल 9 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
लातेहार के हत्या और नरबलि के बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने शुक्रवार को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय संजय कुमार दुबे की अदालत ने आरोपी सुनील उरांव को दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही अदालत ने उस पर अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 9 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला मनिका थाना क्षेत्र के सेमरहट गांव का है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। वर्ष 2019 में सुनील उरांव ने अपने ही पड़ोस में रहने वाले दो मासूम बच्चों की बेहद क्रूर तरीके से हत्या कर दी थी।
आरोप है कि उसने अंधविश्वास के चलते बच्चों की नरबलि दी और हत्या के बाद दोनों के सिर कटे शव को अपने घर के आंगन में बालू के नीचे छुपा दिया था। घटना का खुलासा उस समय हुआ, जब गांव के ही वीरेंद्र उरांव किसी काम से आरोपी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने घर में खून के छींटे देखे और जब इस बारे में पूछा गया तो सुनील उरांव ने बताया कि उसने देवता को मुर्गे की बलि दी है।
लेकिन इसी दौरान वीरेंद्र की नजर आंगन में रखे बालू के ढेर पर पड़ी, जहां से मानव हाथ की उंगलियां दिखाई दे रही थीं। शक होने पर उन्होंने तुरंत अन्य ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी। ग्रामीणों ने जब बालू हटाकर देखा तो वहां दो मासूम बच्चों के सिर कटे शव मिले। इस भयावह दृश्य को देखकर गांव में सनसनी फैल गई।
तुरंत मनिका थाना को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लिया गया। इस मामले में मनिका थाना में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। जांच और सुनवाई के दौरान करीब 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सुनील उरांव को उम्रकैद और 6 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे अतिरिक्त तीन वर्ष का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा शव को छुपाने के अपराध में भादवि की धारा 201 के तहत उसे 7 वर्ष का साधारण कारावास और 3 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। इस जुर्माने के भुगतान में असफल रहने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
प्रकरण के अनुसार, दोनों बच्चे जुलाई 2019 में आरोपी के घर मोबाइल चार्ज करने गए थे। इसी दौरान सुनील उरांव ने उन्हें अपने अंधविश्वास का शिकार बना लिया। इस अमानवीय कृत्य ने न सिर्फ गांव बल्कि पूरे जिले को दहला दिया था।









