झारखंड : “कब्जा हटाने की बजाय घर क्यों तोड़ा” अतिक्रमण की कार्रवाई पर हाईकोर्ट नाराज, CO से मांगा जवाब…अगली सुनवाई अब …

Jharkhand: "Why was the house demolished instead of removing the encroachment?" High Court angry over encroachment action, seeks reply from CO...next hearing now...

रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान मकान तोड़े जाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने प्रशासन से पूछा है कि कब्जा हटाने की बजाय सीधे ढांचों को क्यों ध्वस्त किया गया।
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रांची। अतिक्रमण की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। Jharkhand High Court में इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह सुनवाई न्यायमूर्ति Rajesh Shankar की अदालत में हुई, जहां सुखदेवनगर क्षेत्र में की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर विचार किया गया।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अदालत ने मकानों को ध्वस्त किए जाने पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट रूप से पूछा कि प्रशासन ने कब्जा हटाने की प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे निर्माण को क्यों तोड़ दिया। अदालत ने यह संकेत दिया कि कार्रवाई की प्रक्रिया में संतुलन और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

मामले में हस्तक्षेपकर्ताओं यानी प्रभावित लोगों की याचिका को अदालत ने स्वीकार करते हुए उन्हें प्रतिवादी के रूप में शामिल कर लिया है। साथ ही अंचलाधिकारी (सीओ) द्वारा दिए गए शो-काज नोटिस पर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया है। अदालत ने हस्तक्षेपकर्ताओं को पहले से मिली अंतरिम राहत को भी बरकरार रखा है, जिसके तहत उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई पर रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी।

प्रशासन की ओर से यह बताया गया कि संबंधित लोगों को तीन बार नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद अतिक्रमण हटाने के तहत निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, इस तर्क से अदालत संतुष्ट नहीं दिखी और इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज की।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन को पहले जमीन से कब्जा हटाने की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी, न कि सीधे मकानों को गिराना चाहिए था। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता से भी सवाल किया कि उन्होंने याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ हुए एग्रीमेंट और उनसे लिए गए पैसे की जानकारी क्यों छुपाई।

यह पूरा मामला सुखदेवनगर के खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन से जुड़ा है, जहां जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के तहत 12 मकानों को तोड़ने का आदेश दिया था। कार्रवाई के दौरान बुलडोजर चलाए गए, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया।स्थानीय निवासियों का दावा है कि उन्होंने यह जमीन प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से खरीदी थी और वर्षों से वहां रह रहे हैं।

उनका कहना है कि कुल 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया है। इसके बावजूद अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।फिलहाल अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की है।

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