रांची : फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी मे है स्वास्थ्य विभाग, मरीजों को खून उपलब्ध कराने को लेकर फैसले पर क्यों विभाग है….

Ranchi: The Health Department is preparing to move the High Court against the decision. Why is the department hesitant about providing blood to patients?

झारखंड हाईकोर्ट के बिना डोनर ब्लड उपलब्ध कराने के आदेश को लेकर स्वास्थ्य विभाग असहज है। विभाग इस आदेश में संशोधन के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी में है।
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रांची। झारखंड की राजधानी रांची में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग असमंजस की स्थिति में है, लिहाजा हाईकोर्ट के इस आदेश में संशोधन की मांग को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी है।

स्वास्थ्य विभाग बता रहा व्यवहारिक दिक्कत
दरअसल, हाईकोर्ट ने अपने हालिया निर्देश में कहा है कि मरीजों को बिना डोनर के भी ब्लड उपलब्ध कराया जाए। इस आदेश का उद्देश्य आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और अनावश्यक देरी को रोकना है। लेकिन इस आदेश पर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करना आसान नहीं है और इससे कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा….
वहीं इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले “ब्लड एक्सचेंज” का नियम लागू था। इस व्यवस्था के तहत मरीज के परिजन या किसी डोनर द्वारा ब्लड उपलब्ध कराया जाता था, जिससे ब्लड बैंकों में संतुलन बना रहता था। लेकिन नए आदेश के बाद बिना डोनर के ब्लड देने की स्थिति में ब्लड बैंकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

ब्लड की उपलब्धता बड़ी चुनौती
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में पहले से ही ब्लड की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में यदि बिना डोनर के ब्लड उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की जाती है, तो भविष्य में ब्लड की कमी और अधिक गंभीर हो सकती है। इसके अलावा, ब्लड स्टोरेज और सप्लाई मैनेजमेंट को लेकर भी कई तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं।

हाईकोर्ट में दी जायेगी आदेश को चुनौती
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विभाग कोर्ट के आदेश का सम्मान करता है, लेकिन इस आदेश को व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए कुछ संशोधन आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग जल्द ही हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा, ताकि जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित समाधान निकाला जा सके।

हालांकि जानकारों का कहना है कि इस मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, ताकि एक ओर मरीजों को समय पर रक्त मिल सके और दूसरी ओर ब्लड बैंकों पर अनावश्यक दबाव भी न पड़े। फिलहाल, यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं और न्यायिक निर्देशों के बीच तालमेल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रहा है।

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