JPSC परीक्षा रद्द होने का श्रावणी मेला पर असर, ड्यूटी पर तैनात 70 अफसर लौटे वापस, अफसरों का हो गया टोटा, आखिरी सोमवारी में बढ़ेगी चुनौती
11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद देवघर श्रावणी मेला में तैनात करीब 70 अधिकारी-कर्मचारियों के ड्यूटी छोड़ने से प्रशासन की चुनौती बढ़ी।

देवघर। झारखंड सरकार की ओर से 11वीं से 13वीं JPSC एवं इससे संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी होने के बाद इसका असर अब देवघर के प्रसिद्ध श्रावणी मेला की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त कई अधिकारी और कर्मचारी इस समय श्रावणी मेला में मजिस्ट्रेट समेत अलग-अलग जिम्मेदारियों पर तैनात थे।सरकार के फैसले की जानकारी मिलते ही ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल मच गई। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी अपनी मेला ड्यूटी छोड़कर गृह क्षेत्र या रांची के लिए रवाना हो गए हैं।
JPSC से नियुक्त अधिकारियों ने छोड़ी मेला ड्यूटी
श्रावणी मेला में मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अमित आनंद भी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों में शामिल हैं। सरकार की अधिसूचना की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपने वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी और मेला ड्यूटी छोड़कर रवाना हो गए।इसी तरह ओपी-5 में मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हरे राम ने भी सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद अपनी ड्यूटी छोड़ दी।
बताया जा रहा है कि मेला व्यवस्था में तैनात ऐसे करीब 70 अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिनकी नियुक्ति 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के माध्यम से हुई थी। परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों के ड्यूटी से अलग होने से जिला प्रशासन के सामने अब वैकल्पिक व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
खाली पदों पर दूसरे अधिकारियों की होगी तैनाती
देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने बताया कि उच्च स्तर पर लिए गए निर्णय के बाद कई अधिकारी और कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी छोड़ने की जानकारी जिला प्रशासन को दी है।उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने मेला ड्यूटी छोड़ी है, उनकी जगह जिले के वैसे अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो फिलहाल श्रावणी मेला की ड्यूटी से दूर हैं।डीसी ने कहा कि प्रशासन का पूरा प्रयास है कि मेला व्यवस्था में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाए।
चौथी सोमवारी से पहले प्रशासन की बढ़ी चुनौती
श्रावणी मेला के दौरान लगातार तीन सोमवारी पर प्रशासन को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ संभालनी पड़ी है। अब चौथी और अंतिम सोमवारी से पहले करीब 70 अधिकारी-कर्मचारियों के ड्यूटी से अलग होने के बाद प्रशासन के सामने नए सिरे से तैनाती करने की चुनौती है।
हालांकि डीसी ने भरोसा जताया है कि अंतिम सोमवारी के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह फैसला तीन सोमवारी के बाद आया है और अब सिर्फ एक सोमवारी बची है। चौथी सोमवारी को लेकर जिला प्रशासन दो से तीन गुना अधिक मेहनत करेगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल की अहम भूमिका
श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काम कर रहे समाजसेवी सरोज सिंह ने कहा कि अधिकारियों के ड्यूटी छोड़ने से प्रशासनिक स्तर पर कुछ परेशानियां जरूर आ सकती हैं, लेकिन मेले की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिकारियों के जाने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोग भी प्रशासन के साथ खड़े रहेंगे और हरसंभव सहयोग करेंगे।
JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद बढ़ी हलचल
दरअसल, मंगलवार देर रात राज्य सरकार ने 11वीं से 13वीं JPSC से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। इसके बाद इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी स्थिति को लेकर हलचल शुरू हो गई।देवघर श्रावणी मेला में तैनात करीब 70 अधिकारी-कर्मचारी इसी भर्ती प्रक्रिया के जरिए नियुक्त हुए थे। अधिसूचना जारी होने के बाद कई लोगों ने जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी और अपनी ड्यूटी से अलग हो गए।
अब जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन रिक्त स्थानों पर तत्काल वैकल्पिक अधिकारियों की तैनाती करना है। प्रशासन का कहना है कि अंतिम सोमवारी के दौरान व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
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