JSSC महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में 33 अभ्यर्थियों को बड़ा झटका! हाईकोर्ट ने पलटा खेल, नियुक्ति वाले आदेश पर लगाई रोक

JSSC News: शैक्षणिक योग्यता को लेकर रद्द हुई थी 33 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी, एकल पीठ ने दी थी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति; अब खंडपीठ ने आदेश पर रोक लगाकर मांगा जवाब

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बड़ा आदेश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने JSSC की अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें 33 अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

खंडपीठ ने आकांक्षा कुमारी समेत 33 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 6 अक्टूबर 2026 को होगी।

आखिर क्या है पूरा मामला?

महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा के दौरान JSSC ने 33 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। आयोग का कहना था कि इन अभ्यर्थियों की स्नातक डिग्री नियुक्ति विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी।

अपनी उम्मीदवारी रद्द किए जाने के खिलाफ अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और रिट याचिका दायर की।

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने JSSC के फैसले को निरस्त कर दिया था। साथ ही आयोग को इन 33 अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

JSSC ने खंडपीठ में दी चुनौती

एकल पीठ के आदेश के खिलाफ JSSC ने खंडपीठ में अपील दाखिल की। आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल, प्रिंस कुमार और जयप्रकाश ने अदालत के सामने पक्ष रखा।

JSSC की ओर से दलील दी गई कि 15 मई 2026 को एकल पीठ द्वारा पारित आदेश उचित नहीं था और नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारित नियमों के आधार पर ही आगे बढ़ाई गई थी।

आयोग ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019, 2021 और 2023 की संशोधित नियमावली का गजट नोटिफिकेशन 2026 में हुआ था। इसी नियमावली के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

शैक्षणिक योग्यता बनी विवाद की सबसे बड़ी वजह

पूरे विवाद की जड़ अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता है। JSSC का कहना है कि 33 उम्मीदवारों की स्नातक डिग्री उस योग्यता से मेल नहीं खाती थी, जो संबंधित नियुक्ति विज्ञापन में निर्धारित की गई थी।

इसी आधार पर आयोग ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी।

वहीं, अभ्यर्थियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं है। इसी मामले में एकल पीठ ने अभ्यर्थियों के पक्ष में आदेश दिया था।

अब खंडपीठ ने लगाई एकल पीठ के आदेश पर रोक

अब खंडपीठ के ताजा आदेश के बाद 33 अभ्यर्थियों के लिए स्थिति एक बार फिर बदल गई है। अदालत ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था।

साथ ही सभी 33 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा गया है।

इसका मतलब यह है कि फिलहाल अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का रास्ता अदालत के अगले आदेश तक रुक गया है।

6 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

मामले में अब अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। उस दिन 33 अभ्यर्थियों की ओर से अपना पक्ष रखने के बाद अदालत इस विवाद पर आगे सुनवाई करेगी।

फिलहाल गेंद हाईकोर्ट की खंडपीठ के पाले में है। 33 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता खुलेगा या फिर JSSC का फैसला बरकरार रहेगा, इसका जवाब अगली सुनवाई के बाद ही साफ हो सकेगा।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *