जन्माष्टमी के बाद मोदी कैबिनेट में बड़ा उलटफेर? वैष्णव का प्रमोशन, गडकरी के विभाग में बदलाव की चर्चा; 17 नए चेहरों पर दांव!
Modi Cabinet Reshuffle: बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव के बाद अब केंद्र सरकार में फेरबदल की अटकलें तेज, कई दिग्गजों के विभाग बदले जाने और युवा चेहरों को मौका मिलने की चर्चा

नई दिल्ली। बीजेपी संगठन की नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में मोदी कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि यह बदलाव सितंबर में कृष्ण जन्माष्टमी के बाद या फिर अक्टूबर में हो सकता है।
संभावित फेरबदल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा मंत्रियों के विभागों में बदलाव, कुछ वरिष्ठ चेहरों की जिम्मेदारियां कम करने और नए एवं युवा नेताओं को मौका देने की है।
हालांकि, अभी तक सरकार या बीजेपी की ओर से कैबिनेट विस्तार की आधिकारिक तारीख अथवा संभावित मंत्रियों को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है बड़ा प्रमोशन?
कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम खास तौर पर सामने आ रहा है। फिलहाल उनके पास रेलवे के साथ सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं।
सूत्रों के मुताबिक, फेरबदल की स्थिति में उनके कुछ विभागों का जिम्मा दूसरे मंत्रियों को दिया जा सकता है। वहीं, उन्हें कैबिनेट में और महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने तथा शीर्ष स्तर के मंत्रियों में शामिल किए जाने की भी चर्चा है।
यानी अगर बदलाव होता है तो वैष्णव के विभागों का बंटवारा और उनकी राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों ही अहम मुद्दे हो सकते हैं।
नितिन गडकरी के विभाग में बदलाव की चर्चा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी संभावित फेरबदल की अटकलें हैं। सूत्रों के हवाले से उनके मंत्रालय में बदलाव की चर्चा की जा रही है।
हाल के समय में E-20 पेट्रोल और एथेनॉल से जुड़े मुद्दों को लेकर गडकरी राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। हालांकि, इसे उनकी कैबिनेट से विदाई से जोड़ना फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल है और इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गडकरी खुद कई मौकों पर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जरूरत की बात कर चुके हैं। ऐसे में संभावित कैबिनेट फेरबदल में उनके मंत्रालय की जिम्मेदारी में बदलाव होता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
16-17 नए चेहरों को मिल सकता है मौका
सूत्रों के मुताबिक, संभावित विस्तार में करीब 15 से 17 नए और युवा चेहरों को मोदी सरकार में जगह मिल सकती है। इनमें केंद्रीय राज्यमंत्री के तौर पर नए नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।
बीजेपी के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।
कई मंत्रियों से छीने जा सकते हैं अतिरिक्त विभाग
संभावित फेरबदल की एक वजह कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी होना भी बताई जा रही है।
मौजूदा व्यवस्था में कई मंत्रियों के पास दो या उससे अधिक विभाग हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार के दौरान अतिरिक्त जिम्मेदारियां कम करके नए मंत्रियों को मंत्रालय सौंपे जा सकते हैं।
इससे एक तरफ नए चेहरों को सरकार में जगह मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा मंत्रियों के काम का बोझ भी कम किया जा सकता है।
81 मंत्रियों की अधिकतम सीमा, फिलहाल 69 मंत्री
संविधान के प्रावधानों के अनुसार केंद्र में प्रधानमंत्री समेत मंत्रिपरिषद की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 सदस्यीय लोकसभा के हिसाब से यह अधिकतम 81 होती है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मोदी सरकार में फिलहाल करीब 69 मंत्री हैं। ऐसे में सैद्धांतिक रूप से मंत्रिपरिषद में और सदस्यों को शामिल करने की गुंजाइश मौजूद है।
2027 और 2029 के चुनावों पर भी नजर
अगर कैबिनेट में बड़ा बदलाव होता है तो इसके पीछे सिर्फ प्रशासनिक वजहें ही नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
बीजेपी के लिए 2027 में होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 का लोकसभा चुनाव बेहद अहम होंगे। ऐसे में संभावित फेरबदल में राज्यों, क्षेत्रों, जातीय-सामाजिक समीकरणों और सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
फिलहाल कैबिनेट विस्तार की तारीख से लेकर किन मंत्रियों को हटाया जाएगा और किन नए चेहरों को जगह मिलेगी, इस पर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद अब मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल की चर्चा ने सियासी माहौल जरूर गर्म कर दिया है।









