JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद फिर गरमाया आंदोलन! प्रोजेक्ट भवन के बाहर बारिश में डटे अभ्यर्थी, बोले- ‘बिना गलती नौकरी छीनना अन्याय’
JSSC CGL Protest: नियुक्ति रद्द किए जाने से नाराज चयनित अभ्यर्थियों ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट के बाहर तिरपाल लगाकर धरना शुरू कर दिया है। बारिश और खराब मौसम के बावजूद अभ्यर्थी जमीन पर बैठे हैं और नियुक्ति बहाल होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

Ranchi News: झारखंड में JSSC CGL नियुक्ति रद्द किए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सरकार के फैसले से नाराज चयनित अभ्यर्थियों ने अब राजधानी रांची में मोर्चा खोल दिया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट के बाहर तिरपाल लगाकर धरने पर बैठ गए हैं।
बारिश और खराब मौसम के बावजूद प्रदर्शनकारी धरनास्थल से हटने को तैयार नहीं हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी नियुक्तियां बहाल नहीं की जातीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
हाथों में तख्तियां, गूंज रहे विरोध के नारे
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी हाथों में अलग-अलग नारे लिखी तख्तियां लेकर बैठे नजर आए। इनमें ‘JSSC CGL नियुक्ति बहाल करो’, ‘बिना वजह नियुक्ति रद्द करना अन्याय है’ और ‘न्याय दो या फांसी दो’ जैसे नारे शामिल हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति हासिल की थी और कई महीनों से अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। ऐसे में अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
‘कई युवाओं ने दूसरी सरकारी नौकरी छोड़कर JSSC ज्वाइन किया’
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने दावा किया कि कई चयनित युवाओं ने JSSC CGL की नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं।
कुछ अभ्यर्थियों ने रेलवे, पुलिस और JE जैसी नौकरियां छोड़कर झारखंड सरकार की नौकरी ज्वाइन की थी। अब नियुक्ति रद्द होने के बाद उनके सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे दोबारा अपने पुराने रोजगार में कैसे लौटेंगे।
करीब 2 हजार चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि करीब दो हजार चयनित युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है जो मध्यमवर्गीय और मजदूर परिवारों से आते हैं।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कई अभ्यर्थी अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य हैं। नौकरी मिलने के बाद परिवार को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन नियुक्ति रद्द होने से अब घर चलाने और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन बिना व्यक्तिगत जांच के सभी चयनित अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा क्यों भुगतना पड़े?
एक तरफ धरना खत्म, दूसरी तरफ नया मोर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प तस्वीर भी सामने आई। एक तरफ JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का करीब 25 दिनों से चल रहा धरना समाप्त हुआ और पुराने धरनास्थल से तिरपाल हटाया जा रहा था।
वहीं दूसरी तरफ, चयनित JSSC CGL अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के मुख्य गेट पर नया तिरपाल लगाकर आंदोलन शुरू कर दिया।
यानी एक धरना खत्म होते ही नौकरी बचाने की मांग को लेकर दूसरा मोर्चा खुल गया है।
‘नियुक्ति बहाल होने तक नहीं हटेंगे’
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने साफ कहा है कि वे सरकार के फैसले से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा पास कर अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी हासिल की थी।
अब उनकी मांग है कि सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और जिन अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं है, उनकी नियुक्ति बहाल की जाए।
फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर अभ्यर्थियों के धरने से राजधानी में एक बार फिर JSSC नियुक्ति विवाद गरमा गया है। बारिश के बीच जारी यह प्रदर्शन सरकार के लिए भी नई चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।









