सुबह बादाम, दोपहर में काजू-पिस्ता और शाम को अखरोट, जानिए किस समय कौन-सा ड्राई फ्रूट खाना है फायदेमंद

हेल्थ टिप्स। अच्छी सेहत के लिए खानपान में पौष्टिक चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी है। बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता और मूंगफली जैसे ड्राई फ्रूट्स और नट्स प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स से भरपूर होते हैं। यही वजह है कि इन्हें संतुलित आहार का अहम हिस्सा माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिन के अलग-अलग समय पर इन्हें खाने से आपकी दिनचर्या में शामिल करना आसान हो सकता है?
एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षण प्राप्त गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया है कि किस समय कौन-सा नट्स खाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। उनकी सलाह के अनुसार, सुबह बादाम, दोपहर में काजू और पिस्ता, जबकि शाम को अखरोट खाया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक नट्स के फायदे केवल उन्हें खाने के समय पर निर्भर नहीं करते। इनकी सही मात्रा और नियमित सेवन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
1. सुबह बादाम खाने से मिल सकते हैं कई फायदे
सुबह के समय बादाम खाना दिन की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। बादाम में विटामिन ई, मैग्नीशियम, प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली, मांसपेशियों और मस्तिष्क के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बादाम में मौजूद फाइबर और वसा खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। संतुलित भोजन के साथ इनका सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहयोगी हो सकता है। सुबह नाश्ते के साथ कुछ बादाम खाए जा सकते हैं। इन्हें दलिया, ओट्स या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
कई लोग बादाम को रातभर पानी में भिगोकर खाते हैं। हालांकि, इन्हें भिगोकर खाना जरूरी नहीं है। बिना भिगोए बादाम भी शरीर को पोषक तत्व देते हैं।
2. दोपहर के भोजन के साथ खाएं काजू
काजू स्वाद के साथ पोषण का भी अच्छा स्रोत हैं। इनमें कॉपर, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे जरूरी खनिज पाए जाते हैं। डॉ. सौरभ सेठी ने दोपहर के भोजन के साथ काजू खाने का सुझाव दिया है।
काजू में मौजूद जिंक और आयरन शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली और ऊर्जा के सामान्य चयापचय में योगदान देते हैं। दोपहर के खाने में सीमित मात्रा में काजू शामिल करने से भोजन में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ सकती है। इन्हें सलाद, सब्जी या अन्य व्यंजनों के साथ भी खाया जा सकता है।
हालांकि, काजू में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। इसलिए वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोगों को इनकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए। तेल और अधिक नमक में तले हुए काजू के बजाय सादे या बिना अतिरिक्त नमक वाले काजू चुनना बेहतर हो सकता है।
3. दोपहर में पिस्ता बन सकता है हेल्दी स्नैक
दोपहर के समय हल्की भूख लगने पर कई लोग चिप्स, बिस्कुट या मीठे स्नैक्स खाते हैं। ऐसे में पिस्ता एक पौष्टिक विकल्प हो सकता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, पोटैशियम, विटामिन बी6 और असंतृप्त वसा पाए जाते हैं।
डॉ. सेठी के अनुसार, पिस्ता में मौजूद प्रोटीन और फाइबर पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करते हैं। दोपहर में सीमित मात्रा में पिस्ता खाने से शाम के भोजन से पहले लगने वाली भूख को संभालने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, पिस्ता खाने के लिए दोपहर का समय तय होना जरूरी नहीं है। इसे सुबह या शाम भी खाया जा सकता है। इसके पोषक तत्वों का लाभ लेने के लिए नियमित रूप से संतुलित मात्रा में सेवन करना अधिक महत्वपूर्ण है।
4. शाम को अखरोट खाना हो सकता है अच्छा विकल्प
अखरोट को हृदय और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिहाज से उपयोगी आहार माना जाता है। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड यानी एएलए पाया जाता है, जो पौधों से मिलने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड है।
डॉ. सौरभ सेठी ने शाम के समय अखरोट खाने का सुझाव दिया है। उन्होंने इसमें मौजूद ओमेगा-3 और मेलाटोनिन जैसे तत्वों का उल्लेख करते हुए इसे मस्तिष्क स्वास्थ्य और नींद के संदर्भ में उपयोगी बताया है। हालांकि, इस बात के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि शाम को अखरोट खाने से हर व्यक्ति की नींद निश्चित रूप से बेहतर हो जाती है।
अखरोट को शाम के हल्के नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। इसे दही, सलाद या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ भी खाया जा सकता है।
5. मूंगफली खाने का कोई तय समय नहीं
मूंगफली आसानी से मिलने वाला और अपेक्षाकृत किफायती पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, असंतृप्त वसा, नियासिन और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
डॉ. सेठी के अनुसार, मूंगफली दिन में किसी भी समय खाई जा सकती है। इसे सुबह नाश्ते में, दोपहर के हल्के स्नैक के रूप में या शाम को भूख लगने पर शामिल किया जा सकता है। भुनी हुई मूंगफली एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
हालांकि, बहुत अधिक नमक वाली या तेल में तली हुई मूंगफली का नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए। जिन लोगों को मूंगफली से एलर्जी है, उन्हें इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
6. सुबह और दोपहर के बीच खाएं पाइन नट्स यानी चिलगोजा
पाइन नट्स को चिलगोजा भी कहा जाता है। डॉ. सौरभ सेठी ने इन्हें सुबह और दोपहर के बीच हल्के नाश्ते के रूप में शामिल करने की सलाह दी है। चिलगोजे में हेल्दी फैट, मैग्नीशियम और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
इनमें पिनोलेनिक एसिड नामक फैटी एसिड भी मौजूद होता है। कुछ शुरुआती शोधों में भूख से जुड़े संकेतों के संदर्भ में इसका अध्ययन किया गया है। हालांकि, चिलगोजा खाने से वजन घटने का दावा करने के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
चिलगोजा महंगा होने के कारण हर किसी के लिए रोजाना सेवन का विकल्प नहीं हो सकता। इसकी जगह बादाम, मूंगफली या अन्य उपलब्ध नट्स को भी संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है।
7. पेकान नट्स को डेजर्ट के साथ कर सकते हैं शामिल
पेकान नट्स में पॉलीफेनॉल्स, फाइबर और असंतृप्त वसा पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व संतुलित आहार का हिस्सा बनकर शरीर को लाभ पहुंचा सकते हैं। डॉ. सेठी ने इन्हें भोजन के बाद डेजर्ट के साथ खाने का विकल्प बताया है।
हालांकि, पेकान को मीठे व्यंजन के साथ खाने से उसमें मौजूद अतिरिक्त चीनी के नुकसान खत्म नहीं हो जाते। बेहतर होगा कि इन्हें कम चीनी वाले दही, फलों या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ शामिल किया जाए।
रोज कितने ड्राई फ्रूट्स और नट्स खाने चाहिए?
डॉ. सौरभ सेठी ने रोजाना लगभग एक मुट्ठी नट्स खाने की सलाह दी है। सामान्य तौर पर करीब 25 से 30 ग्राम बिना नमक वाले मिश्रित नट्स कई वयस्कों के लिए उचित मात्रा हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की जरूरत उसकी उम्र, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और पूरे दिन के खानपान पर निर्भर करती है।
नट्स में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इन्हें जरूरत से ज्यादा खाने के बजाय संतुलित मात्रा में लेना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को किडनी से जुड़ी बीमारी है, डॉक्टर ने विशेष आहार की सलाह दी है या किसी नट्स से एलर्जी है, तो सेवन से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेना जरूरी है।
कुल मिलाकर, बादाम, काजू, पिस्ता, अखरोट, मूंगफली और चिलगोजा जैसे नट्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करना पोषण बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है। इनके सेवन का कोई एक अनिवार्य समय नहीं है। सबसे जरूरी है सही मात्रा चुनना, बिना अतिरिक्त नमक वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना और इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाना।









