झारखंड: सिर्फ 5000 में प्रिंस खान को मिलता है कारोबारियों का मोबाइल नंबर, जांच एजेंसी को मिली चौकाने वाली जानकारी, नेटवर्क के संचालन में अभी…

Jharkhand: Prince Khan gets mobile numbers of businessmen for just Rs 5000, investigation agency gets shocking information, network is still under operation...

रांची और बोकारो से जुड़े कुछ युवकों द्वारा पाकिस्तान में छिपे गैंगस्टर प्रिंस खान के नेटवर्क को कारोबारियों की जानकारी उपलब्ध कराने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि मामूली रकम के लालच में ये लोग व्यापारियों की निजी जानकारी गैंग तक पहुंचा रहे थे।
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रांची। प्रिंस खान गैंग की तरफ से लगातार कारोबारियों को कॉल पर धमकी दी जा रही है। हर धमकी के बाद ये सवाल उठता है कि आखिरकार प्रिंस खान के बाद कारोबारियों के नंबर जाते कैसे हैं? कौन उन्हें नंबर उपलब्ध कराता है। अब प्रिंस खान गैंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों को जो सबूत मिले हैं, वो काफी चौकाने वाले हैं। जांच में यह सामने आया है कि पाकिस्तान में छिपे गैंगस्टर प्रिंस खान का नेटवर्क झारखंड के स्थानीय युवकों के जरिए संचालित हो रहा था।

खास बात यह है कि रांची और बोकारो के कुछ युवक मामूली पैसों के लालच में कारोबारियों की संवेदनशील जानकारी गैंग तक पहुंचा रहे थे।जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क में रांची के राहुल राणा और कौशल पंडित के साथ-साथ बोकारो के राकेश सिंह और सुदीश ओझा जैसे नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी स्थानीय स्तर पर सक्रिय थे और बड़े व्यापारियों, बिल्डरों तथा प्रभावशाली व्यक्तियों की जानकारी जुटाने का काम कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि , यह नेटवर्क बेहद संगठित और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। स्थानीय स्तर पर ये लोग पहले व्यापारियों और प्रतिष्ठानों के संपर्क में आते थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनके मोबाइल नंबर, कारोबार से जुड़ी जानकारी और यहां तक कि पारिवारिक विवरण भी जुटा लेते थे। इस पूरी जानकारी को डिजिटल माध्यमों के जरिए गैंगस्टर प्रिंस खान तक पहुंचाया जाता था।

कमाल की बात ये है कि संवेदनशील जानकारी देने के बदले इन युवकों को मात्र 5,000 रुपये तक का भुगतान किया जाता था। यानी बेहद कम रकम के लिए ये लोग बड़े कारोबारियों की सुरक्षा से समझौता कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे। सुदीश ओझा और राकेश सिंह जैसे लोग व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अपनी पहुंच बनाकर निजी संपर्क और मोबाइल नंबर हासिल करते थे।

वहीं राहुल राणा और कौशल पंडित इन जानकारियों को तकनीकी माध्यमों से गैंग तक पहुंचाने का काम करते थे।जैसे ही जानकारी गैंग तक पहुंचती थी, प्रिंस खान के नाम से संबंधित लोगों को धमकी भरे कॉल और वीडियो संदेश भेजे जाते थे। इन कॉल्स के जरिए उनसे मोटी रकम की रंगदारी मांगी जाती थी। इस तरह यह पूरा नेटवर्क स्थानीय स्तर की जानकारी और अंतरराष्ट्रीय अपराधी के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में काम कर रहा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गिरोह की कार्यप्रणाली काफी शातिर है और इसे पकड़ना आसान नहीं था। लेकिन लगातार मिल रहे इनपुट और तकनीकी जांच के आधार पर अब इसके कई अहम लिंक सामने आ चुके हैं।इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि रांची की कुछ युवतियों की भी इस नेटवर्क में संलिप्तता होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इस पहलू की अभी विस्तृत जांच की जा रही है और एजेंसियां इस कड़ी को लेकर भी सतर्क हैं।

सूत्रों के अनुसार, गैंगस्टर प्रिंस खान विदेश में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है। वह अपने स्थानीय सहयोगियों के जरिए लगातार रंगदारी का नेटवर्क बढ़ा रहा था। यह मामला केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है।पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अभियान चला रही हैं। संदिग्ध लोगों की निगरानी बढ़ा दी गई है और कई स्थानों पर छापेमारी भी की जा रही है।

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