झारखंड के बाबूलाल का छत्तीसगढ़ में धमाल: “बांस की छड़ी से शुरू हुआ सफर, अब दुनिया के मंच पर चमकने को तैयार, रसोईया मां के बेटे बाबूलाल ने जीता गोल्ड

Jharkhand's Babulal makes a splash in Chhattisgarh: "A journey that began with a bamboo stick, now ready to shine on the world stage, Babulal, son of a cook, wins gold."

झारखंड के एक छोटे से गांव से निकलकर बाबूलाल हेम्ब्रम ने आर्थिक तंगी के बावजूद वेटलिफ्टिंग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। अब उनका लक्ष्य सीनियर सर्किट में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।
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रायपुर/रांची। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। झारखंड के रामगढ़ जिले के केरिबांदा गांव से आने वाले 19 वर्षीय वेटलिफ्टर बाबूलाल हेम्ब्रम की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद बाबूलाल आज देश के उभरते हुए खिलाड़ियों में अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं।

आसान नहीं था बाबूलाल की राह
बाबूलाल का सफर आसान नहीं रहा। जब पूर्व आर्मी कोच गुरविंदर सिंह ने उनकी शारीरिक बनावट को देखते हुए उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इस खेल को जारी रखने के लिए संसाधन जुटाने की थी। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पास न तो आधुनिक उपकरण थे और न ही ट्रेनिंग के लिए जरूरी किट।

हर दिन 60 किलोमीटर का सफर
लेकिन बाबूलाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने निर्माण स्थलों पर बांस की लकड़ियों और लोहे की रॉड से अभ्यास शुरू किया। इसके बाद उन्होंने झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी के कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया। वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें रोजाना करीब 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था, लेकिन उनका जुनून उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा।

मां स्कूल में रसोईया
बाबूलाल बताते हैं कि 2018 में जब उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की, तब हालात बेहद कठिन थे। उनके परिवार की आय सीमित थी—मां एक स्कूल में रसोइया हैं और पिता छोटे-मोटे काम करके घर चलाते हैं। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे बाबूलाल के लिए खेल में आगे बढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं था।

खेलो इंडिया में जीता गोल्ड
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत के दम पर लगातार सफलता हासिल की। वर्ष 2024 में उन्होंने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2024 में 49 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके अलावा इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग फेडरेशन की वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप और एशियन जूनियर एवं यूथ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने पदक हासिल किए हैं।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में बाबूलाल ने 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। यह उपलब्धि उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करती है।फिलहाल बाबूलाल पटियाला में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं और सीनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना है कि वे कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर देश के लिए पदक जीतें।

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