रक्षाबंधन पर आसमान में होने जा रहा है बड़ा खेल! चांद का 96% हिस्सा छिपेगा, तांबे जैसा लाल दिखेगा… लेकिन भारत में नहीं आएगा नजर

भोपाल, 27 अगस्त। रक्षाबंधन के दिन जब देशभर में भाई-बहन के प्यार का त्योहार मनाया जाएगा, उसी दौरान आसमान में एक बेहद खास खगोलीय घटना होने जा रही है। 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। इस दौरान चंद्रमा का करीब 96.3 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में चला जाएगा, जिससे वह तांबे जैसा लाल दिखाई दे सकता है।
हालांकि, इस पूरी खगोलीय घटना का सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा।
रक्षाबंधन की सुबह लगेगा चंद्र ग्रहण
मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड प्राप्त खगोल विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि भारतीय समय के अनुसार आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त की सुबह शुरू होगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाएगा।
उन्होंने बताया कि आंशिक ग्रहण सुबह 8 बजकर 3 मिनट 54 सेकंड पर शुरू होगा और 11 बजकर 21 मिनट 59 सेकंड पर समाप्त हो जाएगा। यानी यह खगोलीय घटना करीब 3 घंटे 18 मिनट तक चलेगी।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण?
ग्रहण के समय भारत में दिन होगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसी वजह से भारत में रहने वाले लोग इस खगोलीय नजारे को अपनी आंखों से नहीं देख सकेंगे।
यह ग्रहण उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, पश्चिम अफ्रीका और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। अनुमान के मुताबिक दुनिया की करीब 41 फीसदी आबादी इस ग्रहण को देख सकेगी।
आखिर चांद लाल क्यों दिखाई देता है?
जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के कुछ हिस्से को ढक लेती है, तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
इस दौरान चंद्रमा का जो हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में जाता है, वह सामान्य चमकीले रंग के बजाय लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि इस तरह के चंद्रमा को कई बार ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।
15 दिन बाद दूसरा ग्रहण क्यों? वैज्ञानिक ने बताई पूरी सच्चाई
12 अगस्त को हुए सूर्य ग्रहण के ठीक करीब 15 दिन बाद चंद्र ग्रहण होने को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं। कुछ पोस्ट में इसे अनिष्ट से जोड़कर दावा किया जा रहा है।
सारिका घारू ने इन दावों को खारिज करते हुए बताया कि वैज्ञानिक रूप से ग्रहण हमेशा जोड़ी में होते हैं। एक ग्रहण के लगभग 15 दिन बाद दूसरा ग्रहण होना सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन होने वाला यह चंद्र ग्रहण कोई असामान्य या अनोखी घटना नहीं है।
अब अगला ग्रहण कब होगा?
जानकारी के मुताबिक इसके बाद 6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा।
इसके बाद 20-21 फरवरी 2027 को उपछाया चंद्र ग्रहण होगा, जिसे भारत में देखा जा सकेगा। हालांकि, उपछाया चंद्र ग्रहण को आम तौर पर ग्रहण की पारंपरिक मान्यता नहीं दी जाती।
वहीं 2 अगस्त 2027 को अगला पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा, जो भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। इसके बाद 16-17 अगस्त 2027 को उपछाया चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में नजर नहीं आएगा।









