Nepal Flood: 24 घंटे में 332 मौतों के बाद भी खत्म नहीं हुआ खतरा! नई झील में भर रहा पानी, टूटा प्राकृतिक बांध तो फिर आएगा मौत का सैलाब

काठमांडू। नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने तबाही की ऐसी तस्वीरें छोड़ी हैं, जिन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो रहे हैं। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने घरों, सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

लेकिन सबसे डराने वाली बात यह है कि तबाही की पहली लहर के बाद खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक नई प्राकृतिक अवरोधक झील बनने की जानकारी सामने आई है। चीन ने चेतावनी दी है कि झील में आने वाले दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी जमा हो सकता है। यदि प्राकृतिक बांध टूटता है तो भोटेकोशी नदी में एक और अचानक बाढ़ आ सकती है।

आखिर 26 अगस्त को हुआ क्या था?

26 अगस्त की सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक बेहद तेज बाढ़ आई। शुरुआती आशंकाओं में ग्लेशियल झील के फटने से लेकर भूकंपीय गतिविधि तक की बातें सामने आईं, लेकिन बाद के विशेषज्ञ आकलन में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से बने मलबे के बहाव को प्रमुख संभावित कारण माना गया।

लेंडे खोला क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नदी में गिरा। इससे पानी और मलबे का रास्ता प्रभावित हुआ और अचानक एक बेहद शक्तिशाली फ्लड सर्ज नीचे की ओर बढ़ गया। नेपाल के प्रभावित इलाकों में यह भोटेकोशी और आगे त्रिशूली नदी तंत्र तक पहुंचा।

यह सामान्य बाढ़ नहीं, मलबे की दीवार थी

इस आपदा की भयावहता इसलिए ज्यादा थी क्योंकि सैलाब में सिर्फ पानी नहीं था। इसके साथ बर्फ, चट्टान, मिट्टी और भारी मलबा भी बेहद तेज रफ्तार से नीचे आया।

इसी वजह से नदी के रास्ते में आने वाले घर, वाहन, सड़कें और पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। कई जगहों पर मलबे की मोटी परत जम गई। नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया, सैकड़ों अब भी लापता

आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र को मिलाकर 350 से ज्यादा मौतों की जानकारी सामने आई है। वहीं 1,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। तिब्बत के गिरोंग क्षेत्र में चीन ने तीन मौतों और सैकड़ों लोगों के लापता होने की पुष्टि की है।

लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग भी शामिल हैं। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत टीमों को कई इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

अब नई झील ने बढ़ाई सबसे बड़ी चिंता

पहली बाढ़ के बाद अब भोटेकोशी के ऊपरी हिस्से में नई बैरियर झील बनने की सूचना सामने आई है। यह झील उस समय बनती है जब भूस्खलन, बर्फ या चट्टानों का मलबा नदी का रास्ता रोक देता है और पानी उसके पीछे जमा होने लगता है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, चोचेन खोला और पुरेपूर त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी झील में गुरुवार सुबह करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। रिपोर्ट के मुताबिक झील से पानी बाहर निकलना भी शुरू हो गया था, लेकिन आने वाले दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी इसमें पहुंच सकता है।

अगर प्राकृतिक बांध टूटा तो क्या होगा?

यही इस समय सबसे बड़ा सवाल है।

अगर झील को रोकने वाला प्राकृतिक मलबे का बांध अचानक टूट गया, तो जमा पानी एक साथ नीचे की ओर निकल सकता है। इससे भोटेकोशी नदी में दूसरी फ्लैश फ्लड पैदा होने का खतरा है।

ऐसी स्थिति में नदी किनारे मौजूद बस्तियों, पुलों, सड़कों और राहत अभियान में जुटे लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। नेपाल के अधिकारियों ने भी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी है।

चीन ने क्यों बढ़ाई निगरानी?

चीन की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि सीमा क्षेत्र पहले ही बुरी तरह प्रभावित है। सड़कें और संचार व्यवस्था क्षतिग्रस्त हैं और कई इलाकों तक पहुंच मुश्किल हो गई है।

ऐसे में अगर नई झील का प्राकृतिक बांध टूटता है तो बचाव अभियान के बीच अचानक दूसरी बाढ़ आने से स्थिति और जटिल हो सकती है। इसलिए झील के पानी के स्तर और उसके संभावित बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।

नेपाल के किन इलाकों पर ज्यादा खतरा?

पूरे नेपाल पर एक जैसा खतरा नहीं है। सबसे ज्यादा चिंता भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के किनारे बसे इलाकों को लेकर है।

पहली बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई जिलों में भारी नुकसान हुआ। आगे नदी तंत्र से जुड़े दूसरे निचले इलाकों में भी अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने लोगों से नदी किनारे और संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।

हिमालय में क्यों बढ़ रहा है ऐसी आपदाओं का खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और ऊंचाई वाले इलाकों की अस्थिरता ऐसी घटनाओं का जोखिम बढ़ा रही है। तापमान में बदलाव, ग्लेशियरों का पीछे हटना और बर्फ-चट्टान की अस्थिरता अचानक मलबा प्रवाह और बाढ़ को जन्म दे सकती है।

नेपाल की इस आपदा में भी विशेषज्ञों ने ग्लेशियर से जुड़े बर्फ-चट्टान के अचानक खिसकने को संभावित ट्रिगर माना है।

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या एक और सैलाब आएगा?

फिलहाल इसका जवाब पक्के तौर पर कोई नहीं दे सकता। नई बैरियर झील मौजूद है और उसमें पानी लगातार पहुंचने की आशंका जताई गई है। लेकिन प्राकृतिक बांध कब टूटेगा या टूटेगा भी या नहीं, यह अभी निश्चित नहीं है।

यही वजह है कि नेपाल और चीन दोनों तरफ झील की निगरानी, बाढ़ की चेतावनी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पहली बाढ़ ने जो तबाही मचाई है, उसके बाद अब पूरी नजर इस नई झील पर टिकी है—क्योंकि अगर इसका प्राकृतिक बांध अचानक जवाब देता है, तो भोटेकोशी घाटी में एक और खतरनाक फ्लड सर्ज आ सकता है।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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