धर्मशाला की नींव खोदते ही निकलने लगे चांदी के सिक्के! 500-600 साल पुराना खजाना मिलने की खबर से मचा हड़कंप

Mohali News: पंजाब के मोहाली जिले के ऐतिहासिक गांव घड़ूआं में एक पुरानी धर्मशाला के पुनर्निर्माण के दौरान जमीन के नीचे से चांदी के पुराने सिक्के मिलने से इलाके में चर्चा तेज हो गई है। सिक्कों पर उर्दू या फारसी लिपि में लिखावट होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों के बीच इन्हें 500 से 600 साल पुराना बताया जा रहा है, हालांकि सिक्कों की उम्र और ऐतिहासिक महत्व की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मोहाली। पंजाब के मोहाली (एसएएस नगर) जिले में खरड़ के पास स्थित ऐतिहासिक गांव घड़ूआं में उस वक्त लोगों की भीड़ जुट गई, जब जमीन की खुदाई के दौरान अचानक पुराने चांदी के सिक्के मिलने की खबर सामने आई। गांव में एक पुरानी धर्मशाला के पुनर्निर्माण का काम चल रहा था और इसी दौरान नींव की खुदाई करते समय मिट्टी के अंदर से सिक्के निकलने लगे।
सिक्कों पर उर्दू या फारसी लिपि जैसी लिखावट होने की बात कही जा रही है। जैसे ही यह खबर आसपास फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे।
धर्मशाला की नींव खोदते ही निकले सिक्के
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव की बेहद पुरानी और जर्जर धर्मशाला को हटाकर वहां नई इमारत बनाने का काम शुरू किया गया है। मंगलवार को मजदूर नई इमारत की नींव तैयार करने के लिए जमीन की गहरी खुदाई कर रहे थे।
इसी दौरान मिट्टी के भीतर से पुराने चांदी के सिक्के दिखाई देने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सिक्के मिलने के बाद मौके पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों और बच्चों ने कई सिक्के उठा लिए।
इसके बाद देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और लोग जमीन के नीचे मिले इन पुराने सिक्कों को देखने के लिए मौके पर पहुंचने लगे।
500-600 साल पुराने होने का दावा, लेकिन पुष्टि बाकी
स्थानीय काउंसलर शमशेर सिंह ने भी खुदाई के दौरान पुराने सिक्के मिलने की घटना की पुष्टि की है।
स्थानीय लोगों और कुछ जानकारों के बीच इन सिक्कों के करीब 500 से 600 साल पुराने होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कुछ लोग इन्हें मध्यकालीन या मुगलकालीन दौर से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, अभी यह केवल स्थानीय स्तर पर लगाया जा रहा अनुमान है। सिक्के वास्तव में कितने पुराने हैं, किस शासक के शासनकाल में जारी हुए थे और इनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है, इसकी पुष्टि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो पाएगी।
सिक्कों पर लिखावट ने बढ़ाई उत्सुकता
इन सिक्कों को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता उनकी कथित उर्दू या फारसी लिपि की लिखावट को लेकर है। अगर विशेषज्ञ जांच में इनकी प्राचीनता की पुष्टि होती है, तो सिक्कों पर मौजूद लिखावट इनके कालखंड और जारी करने वाले शासक की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सिक्कों की धातु, वजन, आकार, लिखावट और उस पर बने प्रतीकों की वैज्ञानिक जांच से इनके इतिहास के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
अब पुरातत्व विभाग की जांच का इंतजार
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुल कितने सिक्के मिले हैं और वे वास्तव में कितने पुराने हैं?
इसके लिए पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच जरूरी होगी। विशेषज्ञ सिक्कों की धातु, डिजाइन, लिखावट और अन्य ऐतिहासिक संकेतों का अध्ययन कर सकते हैं।
अगर जांच में सिक्के वास्तव में कई सदियों पुराने पाए जाते हैं, तो यह घड़ूआं गांव और आसपास के क्षेत्र के इतिहास को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण खोज साबित हो सकती है।
क्या जमीन के नीचे और भी कुछ छिपा है?
सिक्के मिलने के बाद अब ग्रामीणों में यह उत्सुकता भी बढ़ गई है कि कहीं धर्मशाला की जमीन के नीचे और कोई पुराना अवशेष या ऐतिहासिक सामग्री तो मौजूद नहीं है।
हालांकि, बिना विशेषज्ञों की निगरानी के खुदाई या मिले हुए सिक्कों को अपने पास रखना उचित नहीं है। प्रशासन और पुरातत्व विभाग की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन से मिले ये चांदी के सिक्के महज पुराने सिक्के हैं या फिर घड़ूआं के इतिहास से जुड़ा कोई बड़ा रहस्य अपने अंदर छिपाए हुए हैं।









