सरसों के दाम में आया उछाल, लेकिन सोयाबीन-बिनौला तेल हुए सस्ते! जानिए बाजार में किस तेल का क्या हाल

विदेशी बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू तेल बाजार में मिला-जुला रुख, सरसों में तेजी तो सोयाबीन और बिनौला तेल में गिरावट; मूंगफली और पाम तेल के भाव रहे स्थिर

नई दिल्ली। खाद्य तेल और तिलहन बाजार में बीते सप्ताह कीमतों को लेकर तस्वीर कुछ बदली नजर आई। विदेशी बाजारों में मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में सभी तेलों के भाव एक दिशा में नहीं चले। सरसों तेल-तिलहन के दाम में मामूली तेजी आई, जबकि सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं मूंगफली, कच्चे पामतेल (CPO) और पामोलीन तेल के भाव लगभग स्थिर रहे।

बाजार सूत्रों के मुताबिक सरसों की उपलब्धता कम होने से इसके दाम में सुधार देखने को मिला है। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण सरसों की खरीदारी कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तिलहन महंगा होता है तो उससे तैयार होने वाला तेल भी स्वाभाविक रूप से महंगा रहता है।

सरसों के भाव में कितनी तेजी आई?

बीते सप्ताह सरसों दाना 50 रुपये की मजबूती के साथ 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं सरसों तेल दादरी का भाव 100 रुपये बढ़कर 16,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल के भाव में भी 15-15 रुपये की बढ़त दर्ज की गई। दोनों क्रमश: 2,735-2,835 रुपये और 2,735-2,885 रुपये प्रति टिन (15 किलो) पर बंद हुए।

सोयाबीन में क्यों आई गिरावट?

सोयाबीन तेल-तिलहन के भाव में बीते सप्ताह मामूली गिरावट रही। बाजार सूत्रों के अनुसार तेल संयंत्रों की ओर से कीमतें घटाए जाने का असर बाजार पर पड़ा।

सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव 100-100 रुपये घटकर क्रमश: 6,675-6,725 रुपये और 6,525-6,625 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।

दिल्ली में सोयाबीन तेल का भाव 50 रुपये गिरकर 15,750 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 100 रुपये घटकर 15,550 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 150 रुपये टूटकर 12,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

हालांकि, बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता कम बताई जा रही है और इसके तेल-रहित खल (डीओसी) की स्थानीय मांग बनी हुई है। इसके बावजूद आयातकों की ओर से लागत से नीचे दाम पर सोयाबीन और पाम-पामोलीन तेल की बिक्री का असर घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।

बिनौला तेल भी हुआ सस्ता

बिनौला की उपलब्धता कम होने के बावजूद इसके तेल के भाव में गिरावट देखने को मिली। इसकी एक बड़ी वजह मूंगफली तेल के दाम में बढ़ोतरी नहीं होना बताई जा रही है।

बाजार सूत्रों के अनुसार बिनौला का रिफाइंड तेल मूंगफली तेल के मुकाबले महंगा पड़ रहा है। ऐसे में मांग प्रभावित होने के कारण बीते सप्ताह बिनौला तेल 225 रुपये टूटकर 16,900 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

मूंगफली तेल में क्यों नहीं हुआ बदलाव?

मूंगफली तेल-तिलहन के भाव में बीते सप्ताह कोई खास बदलाव नहीं हुआ। बाजार सूत्रों के मुताबिक सहकारी संस्था नाफेड के पास मूंगफली का स्टॉक मौजूद है और बाजार में इसकी उपलब्धता काफी हद तक नाफेड की बिक्री पर निर्भर करती है।

ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी कमजोर रहने से मूंगफली तिलहन 7,350-7,925 रुपये प्रति क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 17,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,680-2,980 रुपये प्रति टिन पर स्थिर रहे।

पाम और पामोलीन तेल के भाव भी स्थिर

लागत से कम कीमत पर आयातकों की ओर से बिक्री जारी रहने के बावजूद CPO और पामोलीन तेल के भाव में बीते सप्ताह कोई बदलाव नहीं हुआ।

CPO तेल 13,950 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली 15,850 रुपये और पामोलीन एक्स-कांडला तेल 14,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बंद हुए।

बाजार सूत्रों के अनुसार आयातक बैंकों में अपने ऋण साखपत्र (LC) को घुमाते रहने के लिए लगातार बिक्री करते रहते हैं। यही वजह है कि विदेशी बाजारों में मजबूती के बावजूद उसका पूरा असर घरेलू बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है।

सोमवार को बंद रहेगा मलेशिया एक्सचेंज

तेल बाजार से जुड़ी एक और अहम जानकारी यह है कि सोमवार को छुट्टी के कारण मलेशिया एक्सचेंज बंद रहेगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों का असर घरेलू खाद्य तेल बाजार पर किस तरह पड़ता है, इस पर कारोबारियों की नजर रहेगी।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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