अररिया: 67 से अधिक BPSC शिक्षकों की नौकरी पर संकट, विभाग ने मांगी सूची; शिक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
Araria: Jobs of over 67 BPSC teachers at risk; department seeks list; teachers' union threatens agitation.

अररिया:- बिहार में बीपीएससी टीआरई-3 (BPSC TRE-3) के तहत नियुक्त शिक्षकों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अररिया जिले के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 67 से अधिक बीपीएससी शिक्षकों की नौकरी पर अचानक संकट मंडराने लगा है। शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद जिला शिक्षा कार्यालय ने ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर मुख्यालय भेजने की कवायद तेज कर दी है।
यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) से 18 माह का डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध की जा रही है।
आखिर क्यों हो रही है यह कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने इस कार्रवाई के पीछे के कारणों को स्पष्ट किया है:
- विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन: बीपीएससी टीआरई-3 भर्ती के विज्ञापन संख्या 22/2024 की कंडिका-2 (बी)(4) में पहले से ही यह उल्लेख था कि विभाग के 7 दिसंबर 2023 के आदेश के अनुसार, NIOS द्वारा प्रदत्त 18 माह का डीएलएड विद्यालय अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए मान्य नहीं होगा।
- प्रमाण-पत्रों की पुनः जांच: विभाग ने सभी जिलों को टीआरई-3 के तहत नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की दोबारा बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया है।
- सेवा समाप्ति की तलवार: जांच के दौरान यदि किसी शिक्षक की पात्रता का मुख्य आधार केवल यह 18 माह का डीएलएड पाया जाता है, तो विभागीय नियमों के तहत उनकी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
24 घंटे के भीतर मांगा गया था विवरण
इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा बीती 1 जुलाई को ही सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी कर 24 घंटे के भीतर ऐसे शिक्षकों का पूरा विवरण मांगा गया था। अब तक की स्क्रूटनी में जिले में करीब 67 शिक्षक चिह्नित किए जा चुके हैं, जिनकी संख्या आगे और बढ़ सकती है।
1 वर्ष की नौकरी के बाद आफत, शिक्षकों में भारी चिंता
प्रभावित शिक्षकों को सेवा में आए लगभग एक वर्ष का समय हो चुका है। ऐसे में अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से शिक्षकों के सामने रोजगार और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, इस बेहद संवेदनशील मामले पर जिले के शिक्षा विभाग के आला अधिकारी अभी मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।
विभाग का पक्ष: विभागीय सूत्रों का कहना है कि किसी को भी बिना तय प्रक्रिया अपनाए नहीं हटाया जाएगा। जो भी कार्रवाई होगी, वह निर्धारित कानूनी प्रावधानों और विभागीय नियमों के अनुरूप ही की जाएगी ताकि भविष्य में कोई कानूनी बाधा उत्पन्न न हो।
शिक्षक संघ ने जताया कड़ा विरोध, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
विभागीय कार्रवाई की खबर सामने आते ही शिक्षक संगठनों में उबाल है। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अब्दुल कुद्दुस ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा:
“विभाग का यह निर्णय पूरी तरह से गलत है। यदि NIOS का डीएलएड मान्य नहीं था, तो बहाली के दौरान ही विभाग को नीति तय करनी चाहिए थी और उन्हें ज्वाइनिंग नहीं देनी चाहिए थी। नौकरी मिलने के एक साल बाद इस तरह की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। यदि शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए, तो संघ चुप नहीं बैठेगा और उग्र आंदोलन के लिए विवश होगा।”
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस विरोध के बीच क्या रुख अपनाता है और प्रभावित शिक्षकों का भविष्य क्या मोड़ लेता है।







