असम में भी तीर-धनुष : असम चुनाव पर आज दिल्ली में आखिरी रणनीति पर मुहर, हेमंत सोरेन की आज हो सकती गठबंधन पर चर्चा, 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का खाका तैयार…

Bow and arrow in Assam too: Final strategy for Assam elections to be finalised in Delhi today, Hemant Soren may discuss alliance today, blueprint ready to contest elections on 25 seats...

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) असम की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है। पार्टी को उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ मिल चुका है और वह 20-25 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है।
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रांची। झामुमो ने असम चुनाव को लेकर तगड़ी रणनीति तैयार की है। असम में झामुमो अकेले चुनाव लड़ेगी या फिर गठबंधन के साथ उतरेगी, उसे लेकर आज रणनीति साफ हो सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली पहुंचे हुए हैं, जहां इस मुद्दे पर आखिरी रणनीति पर मुहर लगेगी।

Jharkhand Mukti Morcha (झामुमो) ने साफ संकेत दिए हैं कि वह आगामी चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाएगी और जरूरत पड़ने पर अकेले दम पर भी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेगी।झामुमो के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि चुनाव आयोग से उसे उसका पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ मिल गया है। यह चिन्ह पार्टी की पहचान का प्रमुख प्रतीक है और इससे चुनावी मैदान में उसे मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलने की उम्मीद है।

असम में नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।पार्टी सूत्रों के अनुसार, झामुमो असम की करीब 20 से 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। इस दिशा में पार्टी के महासचिव Vinod Pandey असम में डेरा डाले हुए हैं।

वे संभावित उम्मीदवारों की सूची के साथ स्थानीय नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।हालांकि, Indian National Congress के साथ गठबंधन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन झामुमो ने साफ कर दिया है कि यदि उसे सम्मानजनक सीटें नहीं मिलती हैं, तो वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखेगी।

झामुमो की चुनावी रणनीति खासतौर पर असम के चाय बागान (टी ट्राइब) और आदिवासी मतदाताओं पर केंद्रित है। पार्टी इन समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ‘झारखंड मॉडल’ को सामने रखकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। झामुमो का मानना है कि इन वर्गों में उसे बेहतर समर्थन मिल सकता है।

इस बीच, विपक्ष ने झामुमो के इस कदम पर तंज कसना शुरू कर दिया है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने कहा कि असम में भी झामुमो की स्थिति बिहार जैसी ही होगी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी के पास न तो पर्याप्त राजनीतिक ताकत है और न ही संगठनात्मक क्षमता कि वह अकेले दम पर चुनाव लड़ सके।

गौरतलब है कि बिहार चुनाव के दौरान भी झामुमो ने अन्य दलों के साथ तालमेल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।

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