चीनी के दाम ₹70 के पार! आखिर क्यों बढ़ी इतनी महंगी? सरकार ने खोला राज, बीमारी से लेकर अल-नीनो तक को बताया जिम्मेदार
Sugar Price Hike: त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन, 40% तक उछले दाम; सरकार ने E20 को बताया बेवजह जिम्मेदार, सस्ती चीनी के लिए विदेश से मंगवाया जाएगा स्टॉक

नई दिल्ली: तेल और LPG के बाद अब रसोई की एक और जरूरी चीज ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी के बाद कई जगहों पर इसका भाव ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गया है। त्योहारों का सीजन सामने है और ऐसे समय में चीनी के बढ़ते दाम ने घरों से लेकर मिठाई कारोबार तक चिंता बढ़ा दी है।
चीनी की कीमतों में तेजी को लेकर विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है। आरोप लगाया जा रहा है कि E20 और इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के डायवर्जन के कारण देश में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। लेकिन अब सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कीमत बढ़ने की दूसरी वजह बताई है।
तो आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हो गई?
केंद्रीय कृषि मंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक, इस साल चीनी की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह गन्ने के उत्पादन में कमी है।
उनके अनुसार, गन्ने की फसल पर एक तरफ रेड रॉट बीमारी का असर पड़ा, तो दूसरी तरफ अल-नीनो की वजह से मौसम और बारिश की स्थिति प्रभावित हुई। इसका असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के कई देशों में गन्ने के उत्पादन पर पड़ा है।
भारत को इस साल करीब 330 से 340 लाख टन गन्ने के उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन कम बारिश और फसल में बीमारी के कारण उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाया।
रेड रॉट बीमारी ने बिगाड़ा गन्ने का खेल
गन्ने में होने वाली रेड रॉट बीमारी फसल के लिए बड़ी समस्या मानी जाती है। इसके कारण गन्ने की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, अल-नीनो के कारण मौसम में आए बदलाव और कम बारिश ने भी गन्ने की पैदावार पर असर डाला। सरकार का कहना है कि यही वजह है कि चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
सरकार ने उठाया बड़ा कदम, विदेश से आएगी चीनी
त्योहारों से पहले चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात का फैसला किया है।
इसके साथ ही चीनी के निर्यात को रोकने और घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट भी तय कर दी है। इसके तहत डीलर अब सिर्फ 15 दिनों की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
देश में चीनी की कमी है या फिर सरप्लस?
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर देश में चीनी की कमी है तो सरकार कह रही है कि भारत के पास सरप्लस स्टॉक मौजूद है?
कृषि मंत्री के मुताबिक, भारत में फिलहाल करीब 20 से 25 लाख टन चीनी का सरप्लस स्टॉक मौजूद है। वहीं देश में सालाना चीनी की खपत करीब 280 लाख टन है।
इसके बावजूद त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की आशंका को देखते हुए सरकार ने पहले से ही रॉ-शुगर आयात करने का फैसला किया है।
ब्राजील से आएगी चीनी, लेकिन दिवाली तक सस्ता होना मुश्किल!
भारत ब्राजील से भी चीनी मंगाने की तैयारी कर रहा है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के प्रमुख प्रकाश नाइकनवारे के मुताबिक, ब्राजील से चीनी की कुछ खेप मंगाई जा रही है।
हालांकि, इसमें एक पेंच है। ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में आमतौर पर 40 से 45 दिन लग सकते हैं। इसके बाद रॉ-शुगर को प्रोसेस करने में भी समय लगेगा।
यही वजह है कि जानकारों के मुताबिक दिवाली से पहले चीनी के दाम में बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है।
E20 की वजह से चीनी महंगी होने का दावा कितना सही?
चीनी के दाम बढ़ने के बाद विपक्ष की ओर से E20 और इथेनॉल नीति पर सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि गन्ने का इस्तेमाल चीनी बनाने के बजाय इथेनॉल उत्पादन में ज्यादा होने से बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो रही है।
लेकिन खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस दावे को खारिज किया है।
मंत्रालय के मुताबिक, इथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन 2022-23 में करीब 12 फीसदी था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 फीसदी रह गया है। ऐसे में सरकार का कहना है कि मौजूदा कीमत बढ़ोतरी को इथेनॉल डायवर्जन की वजह बताना सही नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल—दिवाली पर मिठाई कितनी महंगी होगी?
त्योहारों से ठीक पहले चीनी के दाम में तेजी ने मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार आयात और स्टॉक लिमिट जैसे कदमों से बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
लेकिन ब्राजील से चीनी आने और उसकी प्रोसेसिंग में लगने वाले समय को देखते हुए दिवाली से पहले कीमतों में बड़ी राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
यानी इस बार त्योहारों की मिठास पर महंगी चीनी का असर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार के आयात वाले फैसले से आने वाले हफ्तों में बाजार की कीमतें कितनी नीचे आती हैं।









