हादसों के बाद कैसे तय होती है मुआवजे की रकम? क्या सिर्फ सरकार की मर्जी से मिलता है मुआवजा? जानें सड़क से लेकर आसमान तक के कड़े कानून

How is the compensation amount determined after accidents? Is compensation awarded solely at the government's discretion? Learn about the stringent laws covering everything from roads to the skies.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज पुरनिया स्थित एक कोचिंग सेंटर में सोमवार दोपहर को एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ एक तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में अचानक भीषण आग लग जाने से 15 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चार लोग इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं।

​इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की तत्कालिक आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की है।

सरकार के इस कदम के बाद अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि किसी भी हादसे के बाद मुआवजे की यह रकम आखिर कैसे तय की जाती है? क्या यह सिर्फ सरकार की इच्छा पर निर्भर करता है या इसके पीछे कोई ठोस कानूनी प्रक्रिया और कड़े नियम काम करते हैं? आइए जानते हैं अलग-अलग हादसों में मुआवजे के कानूनी प्रावधानों को:

​1. सड़क हादसों में कैसे तय होता है मुआवजा?

​अगर किसी व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है या वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है, तो मुआवजे का निर्धारण मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा किया जाता है। इसके तहत कोई एक निश्चित रकम फिक्स नहीं होती, बल्कि मल्टीप्लायर मेथड (गुणांक विधि) का इस्तेमाल किया जाता है।
​अदालत पीड़ित की उम्र, उसकी मासिक आमदनी और उसके ऊपर निर्भर परिवार के सदस्यों की संख्या को आधार बनाती है।
​इसके अलावा अस्पताल के बिल, शारीरिक व मानसिक कष्टों की भरपाई को भी इसमें जोड़ा जाता है।

​2. हिट-एंड-रन मामलों में मुआवजे का नियम

​सड़क पर कई बार ऐसे हादसे होते हैं जहाँ टक्कर मारने वाला वाहन चालक मौके से फरार हो जाता है और उसकी पहचान नहीं हो पाती। कानून में इसे ‘हिट-एंड-रन’ केस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार की एक विशेष ‘हिट-एंड-रन मोटर दुर्घटना मुआवजा योजना’ काम करती है, जिसके तहत मोटर वाहन दुर्घटना कोष से सीधे आर्थिक सहायता दी जाती है:

मृत्यु होने पर: आश्रितों को 2 लाख रुपये की पक्की सरकारी राहत।
​गंभीर रूप से घायल होने पर: पीड़ित को 50,000 रुपये की सहायता राशि।

​3. ट्रेन हादसों में रेलवे अधिनियम के प्रावधान

​ट्रेन दुर्घटनाओं या रेलवे परिसर के भीतर होने वाली किसी भी अप्रिय घटना में मुआवजे की व्यवस्था पूरी तरह से रेलवे अधिनियम 1989 के दायरे में आती है। इसके लिए पीड़ितों को रेलवे दावा न्यायाधिकरण (RCT) में बाकायदा आवेदन करना होता है:

  • मृत्यु या पूर्ण विकलांगता पर: रेलवे प्रशासन की तरफ से परिजनों को 8 लाख रुपये का निश्चित मुआवजा दिया जाता है।
  • अंग भंग होने पर: चोट की गंभीरता (जैसे हाथ-पैर या आंख की रोशनी जाना) के आधार पर यह राशि 64,000 रुपये से लेकर 8 लाख रुपये के बीच तय होती है।
  • अतिरिक्त बीमा: यदि यात्री ने टिकट बुक करते वक्त मात्र कुछ पैसे देकर ट्रैवल इंश्योरेंस का विकल्प चुना है, तो इस 8 लाख के अतिरिक्त 10 लाख रुपये का बीमा क्लेम अलग से मिलता है।

​4. विमान हादसों में मुआवजे के कड़े और अंतरराष्ट्रीय नियम

​हवाई जहाज के हादसों में मुआवजे का नियम सबसे अलग और बेहद सख्त होता है। भारतीय विमानन क्षेत्र में यह व्यवस्था कैरिएज बाई एयर एक्ट 1972 और अंतरराष्ट्रीय मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत संचालित होती है। इसकी गणना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा SDR (स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स) में की जाती है:

  • स्ट्रिक्ट लायबिलिटी का सिद्धांत: इस नियम के तहत एयरलाइन कंपनी की गलती हो या न हो, विमान हादसे में मौत या गंभीर चोट पर कंपनी प्रति यात्री लगभग 1.4 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये देने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है।
  • असीमित मुआवजा: अगर यह साबित हो जाए कि विमान हादसा कंपनी की घोर लापरवाही या पायलट की बड़ी गलती से हुआ था, तो मुआवजे की अधिकतम सीमा हटा दी जाती है और पीड़ित परिवार को असीमित मुआवजा मिल सकता है।

​घरेलू उड़ानों (Domestic Flights) के लिए नियम

​यदि कोई नागरिक देश के अंदर ही घरेलू उड़ान पर सफर कर रहा हो और हादसा हो जाए, तो उस पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के विशेष नियम लागू होते हैं। सरकार के मौजूदा नियमों के अनुसार, भारत के घरेलू आसमान में होने वाले किसी भी विमान हादसे में मृत्यु या गंभीर शारीरिक क्षति होने की स्थिति में संबंधित एयरलाइन कंपनी का न्यूनतम कानूनी दायित्व 20 लाख रुपये तक का तय किया गया है।

निष्कर्ष: किसी भी आपदा या हादसे के बाद मिलने वाली तात्कालिक राहत राशि (जैसे पीएम राहत कोष या सीएम राहत कोष से दी जाने वाली मदद) सरकार के विवेकाधिकार और संवेदनशीलता पर निर्भर करती है, लेकिन विस्तृत और परमानेंट मुआवजा पूरी तरह से देश के मजबूत कानूनी ढांचे और तय नियमों के तहत ही निर्धारित होता है।

Chauhan

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