इंश्योरेंस प्रीमियम भरने में हो गई है देरी? घबराएं नहीं, तुरंत बंद नहीं होगी पॉलिसी; जानें ग्रेस पीरियड का यह नियम
Delayed in paying your insurance premium? Don't panic; your policy won't be cancelled immediately—learn about the grace period rule.

नई दिल्ली: भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग अपने इंश्योरेंस का प्रीमियम समय पर भरना भूल जाते हैं। कई बार बैंक अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस न होने या ट्रांजैक्शन फेल होने की वजह से भी प्रीमियम रुक जाता है। ऐसे में पॉलिसीधारकों के मन में हमेशा यह डर सताता रहता है कि कहीं प्रीमियम लेट होने से उनकी पॉलिसी बंद न हो जाए और उन्हें मिलने वाली वित्तीय सुरक्षा खत्म न हो जाए।
यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। भारत में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के नियम पॉलिसीधारकों को एक बड़ी राहत देते हैं।
तुरंत बंद नहीं होती पॉलिसी, मिलता है ‘ग्रेस पीरियड’
अच्छी बात यह है कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की ड्यू डेट (तय तारीख) निकल जाने के बाद भी पॉलिसी तुरंत बंद नहीं होती है। देश की ज़्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां इसके लिए ग्राहकों को एक ‘ग्रेस पीरियड’ (Grace Period यानी अतिरिक्त समय) देती हैं।
- मासिक प्रीमियम प्लान: यदि आप हर महीने प्रीमियम चुकाते हैं, तो आमतौर पर आपको करीब 15 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है।
- तिमाही, छमाही और सालाना प्लान: यदि आपका प्रीमियम 3 महीने, 6 महीने या सालभर में जाता है, तो कंपनियों की तरफ से लगभग 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाता है।
(नोट: यह समय सीमा अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों और उनकी पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करती है।)
पॉलिसी लैप्स (Lapse) होने पर क्या होता है नुकसान?
अगर आप ग्रेस पीरियड के दौरान भी प्रीमियम नहीं भर पाते हैं, तो आपकी पॉलिसी ‘लैप्स’ यानी बंद हो जाती है। इसके बाद आपको मिलने वाले फायदे इस तरह प्रभावित होते हैं:
- प्योर टर्म इंश्योरेंस में: चूंकि टर्म इंश्योरेंस में सेविंग्स या मैच्योरिटी जैसा कोई फायदा नहीं होता, इसलिए पॉलिसी लैप्स होते ही आपकी फाइनेंशियल सुरक्षा पूरी तरह से बंद कर दी जाती है।
- पारंपरिक (Traditional) पॉलिसी में: परंपरागत सेविंग्स या मनी-बैक पॉलिसियों में प्रीमियम न भरने पर कंपनी की तरफ से मिलने वाले फायदों या रिटर्न में भारी कटौती कर दी जाती है। कुल मिलाकर, सुरक्षा का मूल स्तर काफी कम हो जाता है, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को सही जानकारी नहीं होती।
टर्म इंश्योरेंस बंद होने से बढ़ता है बड़ा आर्थिक जोखिम
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जो परिवार घर के मुख्य कमाने वाले के टर्म इंश्योरेंस पर पूरी तरह निर्भर हैं, उनके लिए पॉलिसी का बंद होना एक बहुत बड़ा आर्थिक जोखिम बन सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय: इन्वेस्टमेंट-लिंक्ड पॉलिसी (जैसे यूलिप) के उलट, टर्म इंश्योरेंस का एकमात्र मकसद परिवार को सुरक्षा देना होता है। अगर यह कवर एक बार खत्म हो गया, तो बाद में नई पॉलिसी लेना बेहद महंगा साबित हो सकता है। बढ़ती उम्र या किसी नई मेडिकल कंडीशन (बीमारी) के कारण भविष्य में नई पॉलिसी का प्रीमियम काफी ज़्यादा चुकाना पड़ सकता है।
काम की सलाह: वित्तीय जानकार हमेशा यही सलाह देते हैं कि चाहे अस्थाई रूप से आर्थिक तंगी ही क्यों न हो, इंश्योरेंस प्रीमियम को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी पुरानी और मौजूदा पॉलिसी को जारी रखना, उसे बंद करके बाद में नई पॉलिसी खरीदने की तुलना में हमेशा कहीं ज़्यादा आसान और किफायती होता है।









