झारखंड: नियमितिकरण, वेतन-भत्ता और सस्पेंशन को लेकर कर्मचारियों का हल्ला बोल, मंत्री के बंगले के खिलाफ धरने पर बैठ प्रदर्शनकारी, पुलिस बल तैनात
Jharkhand: Employees protest against regularization, salary and allowances, and suspension; protesters stage sit-in protest against minister's bungalow, police deployed

रांची। झारखंड में फिर से आंदोलनों का दौर शुरू हो रहा है। राज्य के मनरेगाकर्मियों ने ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के आवास के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। 18 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों ने स्थायीकरण, ग्रेड पे, सामाजिक सुरक्षा और मुआवजा नीति जैसी प्रमुख मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मनरेगा कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री आवास घेराव भी किया जाएगा। विभिन्न जिलों से आए ये कर्मचारी वर्षों से अपनी सेवाओं के अनुरूप स्थायीकरण, सामाजिक सुरक्षा और ग्रेड-पे की मांग कर रहे हैं। संघ ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा और आगे मुख्यमंत्री आवास घेराव की भी योजना बनाई जाएगी।
धरना स्थल पर मौजूद भारी संख्या में पुलिस बल, डीएसपी, थाना प्रभारी और महिला पुलिस बल की तैनाती से साफ संकेत मिल रहे थे कि प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क था। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय ने कहा कि मनरेगा कर्मी पिछले लगभग 18 वर्षों से गांवों में सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।
उन्होंने कहा, “हमने वर्षों तक क्षेत्र में रहकर काम किया, लेकिन हमें आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। जो लोग कार्यालय में काम करते हैं, उन्हें ग्रेड-पे मिलता है, जबकि हम क्षेत्र में सेवा देने वाले कर्मियों को मामूली मानदेय मिलता है। यह अन्याय अब बर्दाश्त नहीं होगा।”पांडेय ने बताया कि मनरेगा रोजगार गारंटी परिषद की बैठक में 30% मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा देने की अनुशंसा की गई थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि स्थायीकरण, ग्रेड-पे, सामाजिक सुरक्षा, निलंबन नीति और मुआवजा–अनुकंपा नियुक्ति जैसे पांच प्रमुख मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाती है, तो राज्यभर में आंदोलन और व्यापक रूप से किया जाएगा।
मनरेगा कर्मचारी संघ की पांच प्रमुख मांगें:
1. स्थायीकरण: सभी मनरेगा कर्मियों की सेवा स्थायी की जाए।
2. ग्रेड-पे: राज्य मनरेगा कोषांग के कर्मियों के समान क्षेत्रीय मनरेगा कर्मियों को भी ग्रेड-पे दिया जाए।
3. सामाजिक सुरक्षा: मनरेगा कर्मियों को जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाए।
4. निलंबन नीति: मध्यप्रदेश की तर्ज पर पारदर्शी निलंबन नीति बनाई जाए।
5. मुआवजा और अनुकंपा नियुक्ति: मनरेगा कर्मियों की मृत्यु होने पर परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। साथ ही, अब तक बर्खास्त किए गए कर्मियों को प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील का अवसर मिले।









