झारखंड: SP साहब हाजिर हो! 8 साल से गायब 6 साल की बच्ची को क्यों नहीं ढूंढ पायी पुलिस ? कोर्ट में एसपी को देना होगा जवाब, जानियें पूरा मामला

Jharkhand: SP, report to the court! Why has the police failed to find a 6-year-old girl who has been missing for 8 years? The SP will have to answer in court. Know the full story.

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने एसपी को तलब कर जवाब मांगा है। पूरा मामला 8 साल से गायब 6 साल की बच्ची से जुड़ा है। सितंबर 2018 से लापता गुमला की 6 वर्षीय बच्ची को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।

बच्ची की मां की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गुमला एसपी को सशरीर उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।

बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने गुमला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने गुमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को बुधवार को सशरीर कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इतने वर्षों बाद भी बच्ची का पता नहीं चल पाना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।

कोर्ट ने एसपी से पूछा है कि आखिर अब तक बच्ची को क्यों बरामद नहीं किया जा सका। साथ ही, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि मामले की जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और बच्ची को कब तक बरामद किए जाने की संभावना है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि एक नाबालिग बच्ची के लापता होने का मामला केवल एक सामान्य आपराधिक प्रकरण नहीं है, बल्कि यह उसके मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।

ऐसे मामलों में राज्य और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। कोर्ट ने यह संकेत दिया कि यदि जांच में लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।इससे पहले राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि बच्ची की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकार की ओर से बताया गया कि पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है।

एसआईटी द्वारा संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ पुराने सुरागों को भी दोबारा खंगाला जा रहा है।हालांकि, कोर्ट राज्य सरकार के इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया।

न्यायालय ने कहा कि केवल “प्रयास जारी हैं” कहना पर्याप्त नहीं है। इतने लंबे समय से बच्ची के लापता होने के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने न आना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अब इस मामले को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं देखेगा।

आपको बता दे कि गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई यह बच्ची उस समय महज 6 साल की थी। उसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने कई स्तरों पर पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन जब लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई या परिणाम सामने नहीं आया, तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हेबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से उन्होंने अपनी बच्ची की बरामदगी की मांग की है।

हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से न केवल पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है, बल्कि यह संकेत भी गया है कि नाबालिगों के लापता होने जैसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सबकी निगाहें बुधवार को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब गुमला एसपी को कोर्ट के समक्ष पूरे मामले की प्रगति और जवाबदेही प्रस्तुत करनी होगी।

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