झारखंड शिक्षक भर्ती : ज्यादा अंक, फिर भी फेल, परीक्षा के नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले पर हाईकोर्ट में सुनवाई, हाईकोर्ट ने JSSC से पूछा, क्या था फार्मूला…

Jharkhand Teacher Recruitment: High marks, still failed, hearing in High Court on the normalization formula of the exam, High Court asked JSSC, what was the formula...

Jharkhand Teacher Exam Result Controversy। झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा-2023 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा के नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले (JSSC Teacher Case) पर गंभीर सवाल उठने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को तलब करते हुए पूरी प्रक्रिया का विस्तृत और वैज्ञानिक आधार पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले ने हजारों अभ्यर्थियों (Jharkhand Teacher Vacancy 2023) के भविष्य को अधर में लटका दिया है।

ज्यादा अंक, फिर भी फेल—क्या है पूरा विवाद? JSSC Normalization
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है। कई ऐसे अभ्यर्थी सामने आए हैं, जिन्होंने अधिक अंक हासिल किए, फिर भी उन्हें असफल घोषित (Normalization Formula in Exams) कर दिया गया। वहीं, कम अंक पाने वाले उम्मीदवार चयनित हो गए। इस विसंगति ने पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अभ्यर्थियों (JSSC Latest Update) का कहना है कि यदि अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद असफलता मिलती है, तो यह मेरिट आधारित प्रणाली के खिलाफ है। इससे न केवल मेहनती उम्मीदवारों का मनोबल टूटता है, बल्कि चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

हाईकोर्ट ने मांगा वैज्ञानिक आधार (Jharkhand High Court News)
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने JSSC से स्पष्ट जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि आयोग यह बताए कि नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला किस आधार पर लागू किया गया और इसका वैज्ञानिक तर्क क्या है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि किस तरह अलग-अलग शिफ्ट के प्रश्नपत्रों के बीच संतुलन बनाया गया।कोर्ट का यह रुख इस बात का संकेत है कि यदि आयोग संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो परीक्षा परिणाम में बदलाव या अन्य निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
पारदर्शिता की मांग तेज (Jharkhand Teacher Recruitment News)
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि आयोग ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि अंक किस तरीके से समायोजित किए गए। इससे कई योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है।अभ्यर्थियों ने कोर्ट से मांग की है कि नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याएं न उत्पन्न हों।

फिलहाल हाईकोर्ट ने JSSC को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई 2026 को निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में आयोग के जवाब के आधार पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे हजारों शिक्षकों की भर्ती जुड़ी हुई है। अब सभी अभ्यर्थियों की नजर कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है।

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