Jharkhand Teachers Protest: शिक्षक दिवस पर झारखंड में बड़ा आंदोलन! 10 हजार शिक्षक-कर्मचारी आज देंगे धरना, 1250 संस्थान होंगे शामिल

लोक भवन के सामने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद राज्यभर में आंदोलन का फैसला; 75% अनुदान बढ़ाने, राज्यकर्मी का दर्जा देने और सेवाशर्त नियमावली लागू करने समेत कई मांगें

 

रांची: शिक्षक दिवस पर जहां पूरे झारखंड में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के करीब 10 हजार वित्तरहित शिक्षक और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने जा रहे हैं। 5 सितंबर को राज्य के करीब 1250 वित्तरहित अनुदानित इंटर कॉलेज, हाईस्कूल, संस्कृत विद्यालय और मदरसों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में होने वाले इस आंदोलन में शिक्षक-कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है।

लोक भवन के सामने प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति

मोर्चा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर लोक भवन के सामने शांतिपूर्ण एक दिवसीय धरना देने की योजना बनाई थी। इसके लिए जिला प्रशासन से लिखित अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिल सकी।

इसके बाद मोर्चा ने आंदोलन को राज्यभर के वित्तरहित शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाने का निर्णय लिया। संगठन के अनुसार, 5 सितंबर को करीब 1250 संस्थानों में शिक्षक-कर्मचारी धरना देंगे।

75 फीसदी अनुदान बढ़ाने की प्रमुख मांग

आंदोलन की प्रमुख मांगों में वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के अनुदान में 75 फीसदी वृद्धि से संबंधित संलेख को जल्द कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजना शामिल है।

मोर्चा का कहना है कि वित्तरहित शिक्षक-कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही इंटर कॉलेज, हाईस्कूल, संस्कृत विद्यालय और मदरसों के शिक्षक-कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर सेवाशर्त नियमावली लागू की जाए।

छात्राओं को सावित्रीबाई योजना का लाभ देने की मांग

मोर्चा ने वित्तरहित संस्थानों में पढ़ने वाली सभी छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने की भी मांग उठाई है।

संगठन का कहना है कि इन संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, ताकि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर मिल सके।

जैक में खाली पदों को भरने की मांग

झारखंड एकेडमिक काउंसिल यानी जैक को लेकर भी मोर्चा ने कई मांगें रखी हैं। संगठन ने वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक और शैक्षणिक पदाधिकारी को हटाने की मांग की है।

इसके अलावा करीब 18 महीने से खाली उपाध्यक्ष के पद और मई से रिक्त सदस्यों के पदों को भरने की मांग भी की गई है।

158 स्कूलों का अनुदान रोकने का विरोध

मोर्चा ने बिहार सरकार से मान्यता प्राप्त 158 स्थापना अनुमति प्राप्त अनुदानित विद्यालयों को वर्ष 2026-27 से मिलने वाले अनुदान पर रोक लगाने के फैसले का भी विरोध किया है।

संगठन ने सरकार से इस फैसले पर रोक लगाने की मांग की है और इन संस्थानों को पूर्व की तरह अनुदान जारी रखने की मांग उठाई है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

मोर्चा की ओर से रखी गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • 75 फीसदी अनुदान वृद्धि से संबंधित संलेख को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाए।
  • वित्तरहित शिक्षक-कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए।
  • संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ मिले।
  • जैक के वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक और शैक्षणिक पदाधिकारी को हटाया जाए।
  • जैक में खाली उपाध्यक्ष और सदस्यों के पदों को भरा जाए।
  • 158 अनुदानित विद्यालयों का 2026-27 से अनुदान रोकने के फैसले पर रोक लगाई जाए।
  • शिक्षक-कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर सेवाशर्त नियमावली बनाई जाए।

आंदोलन की तैयारियों की हुई समीक्षा

आंदोलन को लेकर मोर्चा के अध्यक्ष मंडल की बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में रघुनाथ सिंह, संजय कुमार, नरोत्तम सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, देवनाथ सिंह, फजलुल कादरी अहमद, अरविंद सिंह समेत अध्यक्ष मंडल के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

अब शिक्षक दिवस पर राज्य के करीब 1250 वित्तरहित शिक्षण संस्थानों में होने वाले धरना-प्रदर्शन पर सभी की नजर रहेगी। आंदोलन के जरिए शिक्षक-कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।

Anita Nishad

Anita Nishad is a dedicated and insightful journalist currently serving as a key voice at HPBL News. With a deep-rooted passion for storytelling and truth-seeking, Anita has become a trusted name in digital and broadcast journalism, particularly known for her ability to bring grassroots issues to the forefront.

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