नक्सलियों ने भर दी पुलिस की तिजौरी ! 14 करोड़ को सोना और 6.5 करोड़ कैश किये पुलिस के सुपूर्द, सरेंडर नक्सली बंदूक व हथियार के साथ ला रहे हैं जमीन में दबा खजाना…
Naxalites have filled the police coffers! They handed over 14 crore rupees in gold and 6.5 crore rupees in cash to the police. Surrendered Naxalites are bringing back buried treasure along with guns and weapons...

देश से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा संसद में हो चुकी है। गृहमंत्री ने ऐलान कर दिया है कि देश से अब माओवाद का खात्मा हो गया है। इधर, देश से अलग-अलग राज्यों में लगातार नक्सलियों के हथियार छोड़ने की खबर आ रही है। लेकिन इस दौरान ना सिर्फ हथियार बेशुमार दौलत लेकर भी नक्सली सरेंडर करने पहुंच रहे हैं।
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Naxal News: नक्सलियों के खत्म होते प्रभाव के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। नक्सलियों ने बड़ी संख्या में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण तो किया ही है, काफी दौलत और जेवहरात भी पुलिस के हवाले किया है। छत्तीसगढ़ से इस संबंध में चौकाने वाली जानकारी आयी है। सुरक्षाबलों और पुलिस की कार्रवाई के बीच नक्सलियों द्वारा वर्षों से जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई संपत्ति अब धीरे-धीरे सामने आ रही है।
बीते 20 दिनों में पुलिस को करीब 8.2 किलो सोना और लगभग 6.5 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए हैं। बाजार मूल्य के अनुसार इस सोने की कीमत करीब 14 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा नोटबंदी से जुड़ा हुआ है। एक आत्मसमर्पित नक्सली लीडर ने बताया कि साल 2016 में नोटबंदी के समय नक्सलियों के पास लेवी के रूप में करीब 25 करोड़ रुपए नकद मौजूद थे। इसमें अधिकतर राशि 1000 रुपए के नोटों में थी। नोटबंदी के बाद अचानक इन नोटों के बंद हो जाने से नक्सलियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई कि इतने बड़े कैश का क्या किया जाए।
कैश को सोने में बदलने की साजिश
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में करीब एक करोड़ रुपए गांव वालों के माध्यम से बैंक में बदलवाने की कोशिश की गई, लेकिन लंबी कतारों और सीमित नियमों के कारण यह पूरी तरह संभव नहीं हो पाया। कुछ मामलों में ग्रामीणों द्वारा गड़बड़ी की शिकायत भी सामने आई। इसके बाद नक्सलियों ने कैश को सोने में बदलने का फैसला लिया।
बताया गया कि करीब 20 करोड़ रुपए को सोने में परिवर्तित किया गया। इसके लिए सेंट्रल कमेटी के सदस्य सत्य नारायण रेड्डी उर्फ कोसा और रामचंद्र रेड्डी उर्फ राजू दादा ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के ज्वेलर्स के संपर्क में थे। वहां 5 से 10 प्रतिशत कमीशन देकर नकदी को 24 कैरेट सोने की ईंटों में बदला गया।
जमीन के नीचे छिपाया गया खजाना
सोने को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन के नीचे दबा दिया गया। इनमें बस्तर के दुर्गम इलाके जैसे करेगुट्टा की पहाड़ियां और इंद्रावती नदी के किनारे शामिल हैं। नक्सलियों की योजना थी कि जरूरत पड़ने पर इस सोने को दोबारा कैश में बदल लिया जाएगा।
हालांकि, सितंबर 2025 में अबूझमाड़ क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में कोसा और राजू दादा के मारे जाने के बाद इस खजाने का सटीक लोकेशन रहस्य बन गया। तीसरे जानकार बसवाराजू की भी मौत हो चुकी है, जिससे पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ गई है।
लगातार हो रही बरामदगी
पुलिस और सुरक्षाबल अब आत्मसमर्पित नक्सलियों और मुखबिरों की मदद से इन ठिकानों का पता लगाने में जुटे हैं। 11 मार्च को पहली बार एक किलो सोना बरामद किया गया, जबकि 31 मार्च को 7.2 किलो सोना और मिला। इसके अलावा, 6.5 करोड़ रुपए नकद भी जमीन के नीचे से बरामद किए गए हैं, जिन्हें पॉलीथिन में पैक कर सुरक्षित रखा गया था।









